उत्तराखंड के औद्योगिक शहर रुद्रपुर के निवासी पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी मनोज सरकार का नाम साल 2018 के अर्जुन अवार्ड प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों में सूची में शामिल है. मनोज सरकार ने आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर परिवार की मजबूरियों और शारीरिक अक्षमता की सीमाओं की बाधा को पार करते हुए देश के प्रतिष्ठित खेल सम्मान तक पहुंचकर एक अनुकरणीय मिसाल कायम की है. मनोज सरकार इस समय पैरा-बैडमिंटन की विश्व रैंकिंग में पहले नम्बर पर हैं. रुद्रपुर की इंदिरा बंगाली कॉलोनी इलाके में रहने वाले मनोज ने कड़ी मेहनत और जुझारूपन से अपने सपनों को हक़ीक़त में बदलकर दिखाया. बचपन में किसी कारण से उनके दाएं पैर के पंजे में स्थायी कमजोरी आ गई थी, इसके बावजूद उन्होंने बैडमिंटन जैसे तेज खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो मुक़ाम हासिल किया वो हम सबके लिए प्रेरणादायी है.
एक नजर मनोज की उपलब्धियों पर –
2015 – पैरा-बैडमिन्टन एशियन वर्ल्ड चैम्पियन : स्वर्ण पदक ( पुरुष युगल), कांस्य पदक (पुरुष एकल)
2016 – पैरा-बैडमिन्टन एशियन वर्ल्ड चैम्पियन : स्वर्ण पदक (पुरुष एकल), कांस्य पदक (पुरुष युगल)
2017 – पैरा-बैडमिन्टन वर्ल्ड चैंपियन : रजत पदक (पुरुष एकल)
2018 –
– 4th तुर्की पैरा-बैडमिन्टन चैंपियनशिप : स्वर्ण पदक (पुरूष एकल)
– 1st फ़ज़ा दुबई पैरा-बैडमिन्टन : स्वर्ण पदक (पुरूष एकल)
मनोज सरकार अपनी माता जमुना देवी के साथ
मनोज का जन्म जनवरी 1990 में रुद्रपुर में हुआ. बचपन में ही दाएं पैर के पंजे के शारीरिक रूप से कमजोर होने के बावजूद अपने आसपास के बच्चों को बैडमिंटन खेलता देखकर मनोज ने भी इसे खेलना शुरू किया. मनोज के पिताजी दैनिक मजदूर थे और माताजी घर पर ही बीड़ी बनाने का काम करती थीं. ऐसी कमजोर आर्थिक स्थिति में बैडमिंटन के पुराना रैकेट खरीदकर मनोज ने अपनी मेहनत के बल पर खेल में निपुणता हासिल करने की शुरुआती कोशिश की. पैसों की कमी और शारीरिक कमजोरी जैसी दोतरफा मुसीबत के बीच से गुजरते हुए सफलता प्राप्त करने के लिए मनोज ने संघर्ष को अपना साथी बनाया, उनको शुरुआत से ही अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा था.
मनोज ने बातचीत में बताया कि बचपन से ही वो सामान्य बच्चों को पैर की कमजोरी के बावजूद आसानी से हरा देते थे, लेकिन अच्छे टूर्नामेंट में जाने के मौके नहीं मिले. मनोज ने बी. कॉम की पढ़ाई के लिए रुद्रपुर डिग्री कॉलेज में दाखिला लिया तब एक टूर्नामेंट खेलने के लिए उन्हें कॉलेज की तरफ से अल्मोड़ा जाने का मौका मिला. अल्मोड़ा में सामान्य खिलाड़ियों के खिलाफ मनोज सरकार के खेल ने देश ने मशहूर बैडमिंटन कोच डीके सेन को बहुत प्रभावित किया. श्री सेन ने उनसे कहा कि तुम पैरा-बैडमिंटन की कोचिंग लो. मनोज ने बहुत ईमानदारी से कहा – “सर ये पैरा-बैडमिंटन क्या होता है, मुझे पता नही है”. श्री डीके सेन ने मनोज का सम्पर्क भारत के सर्वश्रेष्ठ पैरा-बैडमिंटन कोच गौरव खन्ना जी से करवाया. मनोज ने इसके बाद पीछे मुड़कर नही देखा. गौरव खन्ना जी के कुशल मार्गदर्शन में मनोज ने साल-दर-साल सफलता की नई ऊंचाइयां हासिल की.
मनोज सरकार और उनके कोच गौरव खन्ना
मनोज ने बताया कि उनको रुद्रपुर राईजिंग क्लब, स्पोर्ट्स क्लब उधम सिंह नगर, जिला बैडमिंटन एसोशिएसन जैसी संस्थाओं ने समय समय पर अपना समर्थन दिया, जिस कारण उन्हें अपने लक्ष्य तक पहुंचने का हौंसला मिलता रहा. बंगलुरू की गो स्पोर्ट्स फाउंडेशन की तरफ से मनोज को सहायता प्राप्त होती है. साल 2018 में 20 लोगों को अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा, जिसमें मनोज सरकार के साथ हिमा दास (एथलीट) और रोहन बोपन्ना (लॉन टेनिस) के नाम भी शामिल हैं.
देश के छोटे शहरों से निकली खेल प्रतिभाओं ने इस दशक में खूब नाम कमाया है. अगर उत्तराखंड की ही बात की जाए तो पर्वतारोहण में पिथौरागढ़ के लवराज सिंह धर्मशक्तू, महिला क्रिकेट में अल्मोड़ा की एकता बिष्ट, भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य रुड़की के ऋषभ पन्त और बैडमिंटन में अल्मोड़ा से लक्ष्य सेन-चिराग सेन कुछ ऐसे नाम हैं जिन्होंने कम सुविधाओं के बावजूद उचित मार्गदर्शन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा मुकाम हासिल कर लिया है और साथ ही उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए उदाहरण भी पेश किया है.
रुद्रपुर के पैरा-एथलीट और मनोज के पुराने साथी हरीश चौधरी ने बताया कि अर्जुन अवार्ड जैसा प्रतिष्ठित सम्मान मिलने के बाद मनोज बहुत उत्साहित हैं और भविष्य में भी अपनी सफलताओं को जारी रखने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं. हालांकि, अपने कोच गौरव खन्ना का नाम इस साल भी ‘द्रोणाचार्य अवार्ड’ की लिस्ट में न पाकर मनोज को थोड़ी निराशा भी हुई. मनोज के पिताजी का पिछले साल ही देहांत हुआ है. मनोज को इस बात बहुत का मलाल है कि 25 सितम्बर को राष्ट्रपति भवन में महामहिम राष्ट्रपति महोदय से ‘अर्जुन अवार्ड’ ग्रहण करते समय उनके पिताजी स्व. मनिंदर सरकार उपस्थित नहीं होंगे. केंद्र सरकार ने मनोज को ‘अर्जुन अवार्ड’ से अलंकृत किया है, अब उम्मीद है कि उत्तराखंड सरकार भी मनोज को एक उचित पुरस्कार और नौकरी देकर उनकी प्रतिभा को सम्मान देगी.
हेम पंत मूलतः पिथौरागढ़ के रहने वाले हैं. वर्तमान में रुद्रपुर में कार्यरत हैं. हेम पंत उत्तराखंड में सांस्कृतिक चेतना फैलाने का कार्य कर रहे ‘क्रियेटिव उत्तराखंड’ के एक सक्रिय सदस्य हैं .
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