काफल तोड़ने वाले लड़के और बूढी चुड़ैल की लोककथा

5 years ago

एक इन्दरू मोल्या था. उसके माँ बाप नहीं थे. वह गायों के साथ रहता था. एक दिन वह गाय चरा…

ट्रेल: कुमाऊं में अंग्रेजी राज का संस्थापक

5 years ago

भारत के अन्य भागों की तरह कुमाऊं में भी अंग्रेजों ने अपनी कूट-नीति से सारे कुमाऊं-गढ़वाल में अपना अधिकार 1815…

एबट माउंट में ख़ब्बीस से इक मुलाक़ात

5 years ago

जी हाँ, ये मुलाक़ात सच्ची है महज़ किस्सागोई नहीं. ख़ब्बीस के मुलाकाती हैं पोलिटिकल साइंस में डी. लिट, दुबले पतले,…

शक्करपारे: दो बच्चों के झगड़े पर मनोहर श्याम जोशी की मीठी कहानी

5 years ago

रोज की तरह, सात साल का गुट्टू मुन्ना अपनी हमउम्र पड़ोसिन चुनमुन के पास खेलने पहुँचा. चुनमुन उसे अपने मकान…

ठेठ गढ़वाल के जीवन से जुड़ी चीज़ों को समझने के लिए एक तरह का रोचक शब्दकोश है ‘काऽरी तु कब्बि ना हाऽरि’

5 years ago

बचपन में नए साल के ग्रीटिंग कार्ड बनाने के दौरान एक युक्ति सीखी थी. रंग में डुबाया हुआ धागा लेकर…

हम जैसा सोचते हैं, वैसे ही बन जाते हैं

5 years ago

हम जीवन में वही बनते हैं, जो अपने बारे में सोचते हैं. हमारी जीवन में वैसी ही घटनाएं घटती हैं,…

भवाली का ताजमहल कहे जाने वाले लल्ली मंदिर का इतिहास

5 years ago

बचपन से भवाली के ताजमहल के नाम से जाने जाने वाली राजपुताना राजघराने की एक धारोहर के बारे में जानने…

दुर्गा भवन स्मृतियों से

5 years ago

जब हम किसी से दूर हों रहे होते हैं, तब हम उसकी कीमत समझने लगते हैं. कुछ ऐसा ही हो…

काऽरी तु कब्बि ना हाऽरि : एक कर्मयोगी शिक्षक की जीवनकथा

5 years ago

पिता ने पुत्र की नियति का निर्धारण करते हुए उसको पैतृक पंडिताई की जागीर सौंप दी थी. पिछली सदी के…

लेखक ललित मोहन रयाल से उनके साहित्यिक सफर पर बातचीत

5 years ago

ललित मोहन रयाल ने हिंदी साहित्यिक जगत में अपनी पूर्व प्रकाशित दो पुस्तकों 'खड़कमाफी की स्मृतियों से' तथा 'अथ श्री…