पहाड़ में कौतिक की बेमिसाल यादें

4 years ago

कौतिक का मतलब होता है मेला. मेले तो हर जगह लगते हैं और हर मेले का अपना सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और…

एक थे कैप्टन धूम सिंह चौहान

4 years ago

बचपन से लेकर जवानी के दिनो तक हम गौचर कस्बे को मेले के लिए जानते थे. गौचर-पानाई का समतल, सेरे…

बद्रीनाथ की 200 साल पुरानी तस्वीर

4 years ago

1808 के समय तक यह माना जाता था कि गढ़वाल स्थित गोमुख में गंगा का उद्गम स्थल है लेकिन कुछ…

‘कुमाँऊनी शब्द सम्पदा’ पुस्तक लोकभाषा को अभिसिंचित करने में सफल है

4 years ago

भाषाविदों के अनुसार कुमाँऊनी एक इंडो आर्यन भाषा है जो कुमाऊँ में प्रचलित है और अलग-अलग जनपदों में थोड़े बहुत…

तो गढ़वाल-कुमाऊं ही नहीं भारत-नेपाल को भी जोड़ती थी कंडी रोड

4 years ago

ऐतिहासिक सब माउंटेन रोड (कंडी रोड) विस्तार और इतिहास इस सड़क को ही आधार मानकर पर्वतीय और गैर पर्वतीय क्षेत्रों…

लोककथा : धौन पानी का भूत

4 years ago

धौन पानी क्षेत्र के एक गांव में तीन लोग रहते थे — सास, ससुर और बहू. सास और ससुर बहु…

इगास लोकपर्व को राजपत्र में स्थान मिलने के मायने

4 years ago

आज का दिन ऐतिहासिक बन गया है. इक्कीस साल के उत्तराखण्ड में, इसके किसी लोकपर्व को पहली बार राजपत्र में…

गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की कविता: बाल दिवस विशेष

4 years ago

प्रख्यात जनधर्मी कलाकार-कवि के रूप में गिर्दा हमारे दिलों में अमर हैं. बाल दिवस पर सुनिये युवा कलाकार करन जोशी द्वारा…

तिवारीजी का झुनझुना बजाने में मस्त हैं आंदोलनकारी

4 years ago

आज एक बुजुर्ग से मुलाकात हुई तो उनके बाजार में आने का कारण यूं ही बस पूछ बैठा. इस पर…

उत्तराखण्ड की ग्रामीण महिलाओं में सामूहिक मेलजोल और उत्सवधर्मिता

4 years ago

सामान्यतः पहाड़ के गांव की महिलाओं के दैनिक जीवन का स्वरूप अत्यधिक व्यस्त और संघर्षमय  रहता है.  छह ऋतुओं, 12 महीने उनके…