जब सुल्ताना डाकू ने कालीकमली वाले बाबा को पांच सौ रुपए चढ़ावा दिया

4 years ago

तब यातायात के साधन सुलभ नहीं थे. उस समय इन दुर्गम पर्वतीय तीर्थों की यात्रा करना अति कठिन कार्य था.…

जब अंग्रेज अधिकारी ने लोकदेवता मोष्ट्या से मांफी मांगने को जागर लगाई

4 years ago

मोष्ट्या सोरघाटी के प्रमुख लोक देवताओं में से एक हैं. जैसा कि एक अलिखित परंपरा हमारे समाज में रही है…

वीजा के लिए इंतजार : अमेरिकी विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल आंबेडकर की जीवनी का हिस्सा

4 years ago

विदेश में लोगों को छुआछूत के बारे में पता तो है लेकिन इससे वास्तविक सामना नहीं पड़ने के कारण वे…

चोपता : खूबसूरत गुलाबी बुराँश का अदभुत संसार

4 years ago

चोपता उत्तराखंड की सबसे खुबसूरत जगहों के रूप ने जानी जाती है. दो हजार छः सौ आठ मीटर की ऊंचाई…

छिपलाकोट अंतर्यात्रा : यूँ शाख पे उगतीं हैं कोमल कोंपलें

4 years ago

पिथौरागढ़ घूमते हुए चंडाक से मोष्टा मानू और आगे छेड़ा गाँव की ओर निकल जाइये. पंचचूली की नयनाभिराम पर्वत श्रृंखला…

लोककथा ‘सूरज के रथ का दाहिना घोड़ा’

4 years ago

एक था राजा, एक थी रानी. उनके पास सिपाही, घोड़े, दास-दासियाँ, धन दौलत सबकुछ था, सिर्फ उन्हें संतान नहीं थी.…

उत्तराखण्ड में वर्तमान शिक्षा प्रणाली का पहला स्कूल 1840 में श्रीनगर में खुला

4 years ago

1823 में ट्रेल ने लिखा — यहां सार्वजनिक स्कूलों जैसी कोई संस्था नहीं है. व्यक्तिगत तौर पर होने वाली पढ़ाई-लिखाई…

ब्रिटिश कुमाऊं में औषधीय खेती की शुरुआत

4 years ago

नौर्मन गिल ने बैलाडोना की खेती 1910 से ही शुरू कर दी थी. उस समय बैलाडोना का (एटरोपा बैलाडोना), की…

चौबटिया के ‘चहाबगिच’

4 years ago

अंग्रेजों को कुमाऊं और गढ़वाल की जलवायु, प्राकृतिक रचना, वनस्पति आदि अपने देश की जैसी लगी सो अंग्रेजों ने अपनी…

‘ओखल’ पहाड़ के परिवारों का आधार

4 years ago

ओखव या ओखली पहाड़ के परिवारों का आधार है. धान कूटने का यह स्थान बेहद पवित्र माना जाता है. इसको…