कला साहित्य

गर्जना और विद्युत की कहानी

बहुत समय पहले गर्जना (बादलों की आवाज़) और विद्युत (आकाशीय बिजली) बाक़ी सभी लोगों के साथ धरती पर ही रहा करते थे लेकिन राजा ने उन्हें लोगों के घरों से बहुत दूर शहर के दूसरे छोर पर रहने को विवश किया. (A Nigerian Folk Tale)

गर्जना एक बूढ़ी भेड़ थी जबकि विद्युत उसका बेटा था. जब भी विद्युत को ग़ुस्सा आता, वह घरों को जला डालता और पेड़ गिरा देता; वह खेतों को भी नुक़सान पहुँचाता और कभी-कभी लोगों को मार भी डालता. जब भी वह ऐसा करता उसकी माँ तेज आवाज़ में उसे रुकने और नुक़सान न करने को पुकार कर कहती लेकिन विद्युत अपनी माँ की बातों की बिल्कुल भी परवाह नहीं करता. जब भी वह बहुत ग़ुस्से में होता तो बहुत तबाही मचाता. आख़िरकार प्रजा इसे और सहन नहीं कर पाई और उसने राजा से उसकी शिकायत कर दी.

इसे भी पढ़ें : बंद दरवाजा – स्मिता कर्नाटक की एक अल्मोड़िया दास्तान

राजा ने विशेष तौर पर आज्ञा दी कि गर्जना और विद्युत शहर छोड़कर दूर झाड़ियों में रहेंगे. लेकिन इस बात से भी कोई फ़ायदा नहीं हुआ क्योंकि जब भी विद्युत ग़ुस्सा होता वो जंगल में उगी झाड़ियाँ जला डालता जिसकी लपट कभी-कभी खेतों तक पहुँचकर उन्हें भी तबाह कर देती.

लोगों ने फिर से राजा से शिकायत की और उसने दोनों को धरती से निकालकर आसमान में रहने का आदेश दे दिया जहाँ से वे इतनी तबाही नहीं मचा सकते थे. उसी समय से जब भी विद्युत ग़ुस्सा होता है तब वो पहले की ही तरह नुक़सान तो करता है लेकिन तब हम उसकी माँ गर्जना को उसे डाँटते और रुक जाने को कहते सुन सकते हैं. कभी-कभी, जब माँ अपने उद्दंड बच्चे से दूर गई होती है, हम अब भी देख सकते हैं कि वो ग़ुस्से में है और नुक़सान कर रहा है पर तब उसकी माँ की आवाज़ नहीं सुनाई देती.

नाइजीरियन लोक कथा का अंग्रेज़ी से अनुवाद — स्मिता कर्नाटक

स्मिता को यहाँ भी भी पढ़ें: रानीखेत के करगेत से कानपुर तक खिंची एक पुरानी डोर

हल्द्वानी में रहने वाली स्मिता कर्नाटक की पढ़ाई लिखाई उत्तराखण्ड के अनेक स्थानों पर हुई. उन्होंने 1989 में नैनीताल के डी. एस. बी. कैम्पस से अंग्रेज़ी साहित्य में एम. ए. किया. वे संस्मरण और कहानियाँ लिखती हैं और हिंदी तथा अंग्रेज़ी में अनुवाद करती हैं. लोककथाओं के अनुवाद में उनकी विशेष दिलचस्पी है. वे एक वॉयस ओवर आर्टिस्ट भी हैं और कई जाने माने लेखकों की कविताओं और कहानियों को अपने यूट्यूब चैनल देखती हूँ सपने पर आवाज़ दे चुकी हैं.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online

Support Kafal Tree

.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Sudhir Kumar

Recent Posts

क्या उत्तराखंड, पारिस्थितिक वहन क्षमता को लागू कर सकता है?

हाल ही में मेरी उत्तराखंड यात्रा, हरिद्वार, मसूरी, देहरादून और टिहरी, ने मुझे यह गहरा एहसास कराया कि…

18 hours ago

कानिया के प्रेम में दीवानी सुबनी : लोककथा

रात ढलते ही जब सुबनी और लाली दोनों बहनें पानी भरने के लिए गाँव के…

1 week ago

चीड़ की छाल को कलाकृतियों का रूप दे रहा एक कलाकार

चीड़ के जंगल उत्तराखण्ड के कुमाऊं व गढ़वाल क्षेत्र में 900 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर बहुतायत में पाये…

1 week ago

मेरी यादों का पहाड़ : एक बहुआयामी किताब

2013 सन् में नेशनल बुक ट्रस्ट ने देवेन्द्र मेवाड़ी की किताब 'मेरी यादों का पहाड़' छापकर सराहनीय…

1 week ago

पहाड़ की पुकार जो खींच ले गई मुझे

नौ साल बाद पिथौरागढ़ जा रहा था. पिछले कुछ वर्षों में जब भी छुट्टी मिली, बेटी…

2 weeks ago

‘मनिला डांडे की देवी मां आज बहुत उदास है

देवी मां उदास है परन्तु परलोक गया पुत्र आज भी यादों में आकर उसको हिम्मत…

2 weeks ago