हैडलाइन्स

हम पांच साल में दस बार मुख्यमंत्री बदलें आपसे क्या लेना देना: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

उत्तरकाशी में विजय संकल्प यात्रा में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल हुये. उत्तरकाशी में राजनाथ सिंह ने एक जनसभा को संबोधित किया. इस भाषण के एक हिस्से पर अब विवाद हो रहा है. अपने भाषण के एक हिस्से में उन्होंने कहा-
(Rajnath Singh in Uttarakashi)

कहते हैं ये भारतीय जनता पार्टी वाले क्या चुनाव लड़ेंगे ये तो पांच साल में तीन बार मुख्यमंत्री बदलते हैं अरे हम पांच साल में दस बार मुख्यमंत्री बदलें आपसे क्या लेना देना. हम पांच साल में दस बार बदलें और बहिनों भाइयो यदि हमने आपसे वादा किया होता, यदि किसी को प्रोजेक्ट करके हम इसको मुख्यमंत्री बनायेंगे प्रोजेक्ट करके हमने चुनाव लड़ा होता तो हम पांच वर्ष में एक भी मुख्यमंत्री न बदलते. पार्टी ने चुनाव लड़ा था पार्टी का यह अंदरूनी मामला था. हमको जब लगा तब पार्टी ने फैसला लिया और पार्टी मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री बदल लिया. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की पूरी बात ऊपर दिये वीडियो में सुनिये:

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में राम मंदिर बनाये जाने पर भी अपनी बात रखी और बिना नाम लिये कांग्रेस नेता हरीश रावत पर निशाना साधा. रक्षामंत्री ने अपने भाषण में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को धाकड़ धामी बताकर खूब तारीफ़ की और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के क्रिकेट की भी जमकर तारीफ की.
(Rajnath Singh in Uttarakashi)

रक्षा मंत्री ने पुष्कर सिंह धामी की तारीफ करते हुये कहा कि मैं भी मुख्यमंत्री रहा हूँ लेकिन मैं सोच भी नहीं सकता इतने काम कार्यकाल में कोई व्यक्ति इतनी तेजी से फैसले ले सकता है.

रक्षामंत्री के इस बयान का विपक्ष यह कहकर विरोध कर रहा है कि उन्होंने राज्य की जनता का अपमान किया है. विपक्ष का कहना है कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह बेहद निराशाजनक है वह इस तरीके के बयान सत्ता के घमंड में दे रहे हैं.
(Rajnath Singh in Uttarakashi)

काफल ट्री फाउंडेशन

Support Kafal Tree

.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

क्या उत्तराखंड, पारिस्थितिक वहन क्षमता को लागू कर सकता है?

हाल ही में मेरी उत्तराखंड यात्रा, हरिद्वार, मसूरी, देहरादून और टिहरी, ने मुझे यह गहरा एहसास कराया कि…

19 hours ago

कानिया के प्रेम में दीवानी सुबनी : लोककथा

रात ढलते ही जब सुबनी और लाली दोनों बहनें पानी भरने के लिए गाँव के…

1 week ago

चीड़ की छाल को कलाकृतियों का रूप दे रहा एक कलाकार

चीड़ के जंगल उत्तराखण्ड के कुमाऊं व गढ़वाल क्षेत्र में 900 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर बहुतायत में पाये…

1 week ago

मेरी यादों का पहाड़ : एक बहुआयामी किताब

2013 सन् में नेशनल बुक ट्रस्ट ने देवेन्द्र मेवाड़ी की किताब 'मेरी यादों का पहाड़' छापकर सराहनीय…

1 week ago

पहाड़ की पुकार जो खींच ले गई मुझे

नौ साल बाद पिथौरागढ़ जा रहा था. पिछले कुछ वर्षों में जब भी छुट्टी मिली, बेटी…

2 weeks ago

‘मनिला डांडे की देवी मां आज बहुत उदास है

देवी मां उदास है परन्तु परलोक गया पुत्र आज भी यादों में आकर उसको हिम्मत…

2 weeks ago