समाज

चंदवंश के संस्थापक के विषय में बहस क्यों है

कुछ साल पहले यूके.एस.एस.सी ने एक प्रतियोगी परीक्षा में चंद वंश का संस्थापक पूछा था. इसके जवाब में दिए विकल्पों में सोमचंद और थोहरचंद, के साथ दो अन्य शासकों के नाम दिये थे. यूके.एस.एस.सी द्वारा जारी की गयी उत्तर कुंजी में चंदवंश का संस्थापक थोहरचंद को बताया गया.

इसके बाद से ही एक बहस शुरू हो गयी की चंद वंश का संस्थापक कौन है? यह बहस इस वजह से शुरू हुई क्योंकि उत्तराखंड के इतिहास का महत्वपूर्ण स्त्रोत माने जाने वाली दो पुस्तकों, एटकिंसन की हिमालयन गजेटियर और बद्रीदत्त पांडे की किताब कुमाऊं का इतिहास, दोनों में ही चंद वंश का संस्थापक सोमचंद को बताया गया है.

यह बात अलग है कि दोनों ही लेखक सोमचंद के मूल वंश पर एकमत नहीं हैं. फिर सवाल आता है कि यूके.एस.एस.सी. किस आधार पर थोहरचंद को चंदवंश का संस्थापक मान रहा है?

उत्तराखण्ड के इतिहास से जुड़ी एक दस्तावेज है, रिपोर्ट ऑन कुमाऊं एंड गढ़वाल. यह डब्लू फ्रेजर की रचना है. इसी तरह एक अन्य दस्तावेज़ द एकाउंट ऑफ़ दी किंगडम ऑफ़ नेपाल है जो कि फ्रांसिस हैमिल्टन ने लिखा है. इन दोनों ने ही थोहरचंद को चंद वंश का संस्थापक माना है.

एक तरफ फ्रेजर ने अपने विवरण का आधार हर्षदेव जोशी से प्राप्त जानकारी को माना है तो वहीं फ्रांसिस हैमिल्टन ने अपना संदर्भ जयदेव त्रिपाठी के पुत्र कनकनिधि तिवारी और हरिवल्लभ पांडे से फरुक्काबाद में हुई मुलाकात को बताया है. इन दोनों के आलावा काली कुमाऊं के बैतड़ी क्षेत्र में गायी जाने वाली जागर गाथाओं में भी चंदवंश का संस्थापक थोहरचंद को ही माना गया है.

सवाल है कि चंदवंश का संस्थापक कौन है? इस सन्दर्भ में जब ऐतिहासिक तारीखों का मिलान किया जाता है तो फ्रेजर और हैमिल्टन की बात गलत निकलती है. थोहरचंद से पहले बीस से अधिक चंद राजा शासन कर चुके थे क्योंकि थोहरचंद ने काली कुमाऊं का बड़ा क्षेत्र अपने राज्य में मिलाया था जिसके कारण कुछ अन्य इतिहासकारों ने उसे चंदवंश का वास्तविक संस्थापक लिखा.

इसतरह सोमचंद ही चंद शासक के संस्थापक हैं. सोमचंद से प्रभावित होकर अंतिम कत्यूरी शासक ब्रह्मदेव ने अपनी पुत्री का विवाह सोमचंद से किया और चम्पावत छावनी को उपहार स्वरूप सौंपा. सोमचंद द्वारा ही चम्पावत का राजबुंगा किला (सुयो का किला ) बनाया गया.

-काफल ट्री डेस्क

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Girish Lohani

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