पाब्लो नेरुदा इटली में (1952)
बीसवीं सदी के सबसे बड़े कवियों में शुमार किये जाने वाले पाब्लो नेरूदा का पहला काव्य संग्रह था ‘वेइन्ते पोएमास दे आमोर ई ऊना कान्सीयोन देसएस्पेरादा’ (बीस प्रेम कविताएं और हताशा का एक गीत). १९२४ में इस पतली सी किताब के प्रकाशित होने के बाद पाब्लो विश्वविख्यात नाम हो गये. फ़कत बीस साल की उम्र थी तब उनकी.
यह इन कविताओं में पूरी ईमानदारी से बयान किया हुआ युवा नेरूदा का अगाध प्रेम और उस से उपजी हताशा और कुंठा सब मिलकर इस संग्रह को कालजयी बना चुके हैं.
काफल ट्री के पाठकों के लिए इस संग्रह की सबसे प्रसिद्ध कविता का अनुवाद प्रस्तुत है.
लिख सकता हूं आज की रात बेहद दर्दभरी कविताएं
लिख सकता हूं आज की रात बेहद दर्दभरी कविताएं
लिख सकता हूं उदाहरण के लिये: “तारों भरी है रात
और तारे हैं नीले, कांपते हुए सुदूर”
रात की हवा चक्कर काटती आसमान में गाती है.
लिख सकता हूं आज की रात बेहद दर्दभरी कविताएं
मैंने प्रेम किया उसे और कभी कभी उसने भी प्रेम किया मुझे
ऐसी ही रातों में मैं थामे रहा उसे अपनी बांहों में
अनन्त आकाश के नीचे मैंने उसे बार-बार चूमा.
उसने प्रेम किया मुझे और कभी-कभी मैंने भी प्रेम किया उसे.
कोई कैसे प्रेम नहीं कर सकता था उसकी महान और ठहरी हुई आंखों को.
लिख सकता हूं आज की रात बेहद दर्दभरी कविताएं.
सोचना कि मेरे पास नहीं है वह. महसूस करना कि उसे खो चुका मैं.
सुनना इस विराट रात को जो और भी विकट उसके बग़ैर.
और कविता गिरती है आत्मा पर जैसे चरागाह पर ओस.
अब क्या फ़र्क़ पड़ता है कि मेरा प्यार संभाल नहीं पाया उसे.
तारों भरी है रात और वह नहीं है मेरे पास.
इतना ही है. दूर कोई गा रहा है. दूर.
मेरी आत्मा संतुष्ट नहीं है कि वह खो चुकी उसे.
मेरी निगाह उसे खिजने की कोशिश करती है जैसे इस से वह नज़दीक आ जाएगी.
मेरा दिल खोजता है उसे और वह नहीं है मेरे पास.
वही रात धवल बनाती उन्हीं पेड़ों को
हम उस समय के, अब वही नहीं रहे.
मैं उसे और प्यार नहीं करता, यह तय है पर कितना प्यार उसे मैंने किया
मेरी आवाज़ ने हवा को खोजने की कोशीस की ताकि उसे सुनता हुआ छू सकूं
किसी और की. वह किसी और की हो जाएगी. जैसी वह थी
मेरे चुम्बनों से पहले. उसकी आवाज़ उसकी चमकदार देह उसकी अनन्त आंखें
मैं उसे प्यार नहीं करता यह तय है पर शायद मैं उसे प्यार करता हूं
कितना संक्षिप्त होता है प्रेम, भुला पाना कितना दीर्घ.
क्योंकि ऐसी ही रातों में थामा किया उसे मैं अपनी बांहों में
मेरी आत्मा संतुष्ट नहीं है कि वह खो चुकी उसे.
हालांकि यह आख़िरी दर्द है जो सहता हूं मैं उसके लिये
और ये आख़्रिरी उसके लिये कविताएं जो मैं लिखता हूं.
(संवाद प्रकाशन द्वारा प्रकाशित ‘बीस प्रेम कविताएं और हताशा का एक गीत‘ से. मूल स्पेनिश से अनुवाद: अशोक पाण्डे)
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है,…
पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…
पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…
ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…
उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…
पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…