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पर्यावरण का नाश करके दिया पृथ्वी बचाने का संदेश

पृथ्वी दिवस पर विशेष

सरकारी महकमा पर्यावरण और पृथ्वी बचाने के संदेश देने के लिए काफी कुछ करता है लेकिन कभी-कभी इनके काम करने का ढंग समझ ही नहीं आता है. पनचक्की चौराहा पर एक पाकड़ का पेड़ लगा था. पेड़ हरा-भरा और काफी बड़ा था. बाद में इस पेड़ को काटकर लोक निर्माण विभाग और नगर निगम ने मिलकर पनचक्की चौराहा सौंदर्यीकरण के साथ पृथ्वी बचाने का मॉडल यहां लगा दिया. (Destroying The Environment)

ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि किसी हरे-भरे पेड़ को काटकर वहां पृथ्वी बचाने का संदेश दिया जाए लेकिन हल्द्वानी में ऐसा ही हुआ है. पनचक्की चौराहा पर पहले एक पुलिस बूथ बनाया गया था और बिजली का ट्रांसफार्मर भी रखा गया था. इसके साथ ही यहां पाकड़ का विशाल पेड़ भी था. चौराहे पर पाकड़ का पेड़ होने से राहगीरों को आते-जाते समय कुछ देर के लिए गर्मी से राहत मिलती थी. कुछ लोग उस पेड़ के नीचे बैठकर आराम भी कर लेते थे. चौराहे पर हरा पेड़ अपने आप में सौंदर्य बिखेर रहा था.

अभी पेड़ बढ़ता और साथ ही और ज्यादा सौंदर्य बिखेरता लेकिन उससे पहले लोनिवि और तत्कालीकन नगर आयुक्त ने पनचक्की चौराहे के सौंदर्यीकरण की योजना बना डाली. करीब तीन साल पहले योजना के तहत यहां एक निर्माण किए जाने और साथ ही उसके ऊपर पृथ्वी बचाने का मॉडल लगाने की भी योजना बनी. पेड़ काटकर विभाग के अधिकारियों ने यहां पृथ्वी बचाने का मॉडल लगा दिया, जो बता रहा है कि लोगों को पृथ्वी को बचाना चाहिए लेकिन वह यह नहीं बता रहा कि इस संदेश को देने के लिए एक हरे-भरे पेड़ की बलि ली गई है.

अधिक ऑक्सीजन देने वाला पेड़ है पाकड़

विशेषज्ञों के अनुसार पाकड़ पर्यावरण के लिए बहुत लाभदायक होता है. इसकी शाखा भी पनप जाती है. इसका पेड़ घना होकर शीतल छाया देता है. अधिक उम्र तक जीवित रहने, अधिक पत्तियों और सबसे छोटा पतझड़ काल होने के कारण पाकड़ में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया हमेशा होती है. इस से आक्सीजन उत्सर्जन भी अधिक होता है. (Destroying The Environment)

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इसे भी पढ़ें : पिथौरागढ़ के लोगों ने इस तरह पर्यावरण को अपनी परम्पराओं की डोर से सहेजा

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Sudhir Kumar

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