समाज

टिहरी नगर और रियासत की स्थापना तिथि

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पिछले कुछ सालों से, ये सवाल काफी बेचैन करता था कि टिहरी नगर/रियासत स्थापना दिवस पर सर्वसम्मति क्यों नहीं है. दो सौ साल पुरानी ही तो बात है. इतिहास में इस कालखण्ड को कंटेम्पररी एज कहा जाता है. इस पर भी कहीं 28 दिसम्बर को टिहरी स्थापना दिवस मनाया जा रहा है और कहीं 30 दिसम्बर को.
(Tehri Sthaapna Divas)

इस साल टिहरी पर कुछ गहराई से अध्ययन किया तो इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि टिहरी नगर और रियासत की स्थापना तिथि 29 दिसम्बर 1815 है. विस्तार से भी लिखूंगा. लेख या इतिहास-कथा के रूप में. अभी बस इतना बताना चाहता हूँ कि 29 दिसम्बर के पक्ष में मेरा तर्क-आधार क्या है.

इस सम्बंध में किसी भी पूर्व लेखक या इतिहासकार के मत को मैं आधार नहीं बना रहा हूँ. मेरा मत का सीधा आधार ये तथ्य है (जो मैंने स्वयं जाँचा है) कि 30 दिसम्बर 1815 को शनिवार था, अमावस्या थी और सूर्य ग्रहण भी था. जरा सोचिए कि चार धामों की थाती वाली रियासत के धर्मपरायण नरेश क्या ऐसे दिन अपनी नयी राजधानी का श्रीगणेश कर सकते हैं. कभी नहीं.
(Tehri Sthaapna Divas)

अगला स्वाभाविक सवाल ये होगा कि फिर 28 दिसम्बर क्यों नहीं हो सकता. और मेरा उत्तर ये कि 28 दिसम्बर 1815 को त्रयोदशी और 13 प्रविष्ठे/तिथि थी और दिन था बृहस्पतिवार. जबकि टिहरी नगर की मानक जन्मकुण्डली में जन्मतिथि/स्थापना तिथि विक्रमी संवत् के पौष माह, कृष्ण पक्ष की 14 प्रविष्ठे है और दिन शुक्रवार.

इस तरह सिद्ध हुआ कि टिहरी नगर और रियासत की स्थापना तिथि 29 दिसम्बर 1815 है. आज 29 दिसम्बर है और संयोग से शुक्रवार भी. टिहरी नगर और रियासत की स्थापना दिवस की आप सबको हार्दिक बधाई. इतिहास में जो तिथियाँ दर्ज़ ही नहीं हो सकी हैं, उनका मलाल होना स्वाभाविक है पर जो दर्ज़ हैं,उन पर मतभेद होना मूढ़ता ही कही जाएगी.
(Tehri Sthaapna Divas)

देवेश जोशी 

सम्प्रति राजकीय इण्टरमीडिएट कॉलेज में प्रवक्ता हैं. साहित्य, संस्कृति, शिक्षा और इतिहास विषयक मुद्दों पर विश्लेषणात्मक, शोधपरक, चिंतनशील लेखन के लिए जाने जाते हैं. उनकी प्रकाशित पुस्तकें है: जिंदा रहेंगी यात्राएँ ( संपादन, पहाड़ नैनीताल से प्रकाशित), उत्तरांचल स्वप्निल पर्वत प्रदेश (संपादन, गोपेश्वर से प्रकाशित), कैप्टन धूम सिंह चौहान (सैन्य इतिहास, विनसर देहरादून से प्रकाशित), घुघती ना बास (लेख संग्रह विनसर देहरादून से प्रकाशित) और सीखते सिखाते (शैक्षिक संस्मरण और विमर्श, समय-साक्ष्य देहरादून से प्रकाशित). उनके दो कविता संग्रह – घाम-बरखा-छैल, गाणि गिणी गीणि धरीं भी प्रकाशित हैं. आकाशवाणी और दूरदर्शन से वार्ताओं के प्रसारण के अतिरिक्त विभिन्न पोर्टल्स पर 200 से अधिक लेख प्रकाशित हो चुके हैं.

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