ब्रजभूषण पाण्डेय

जाने का भी क्या समय चुना यार? अलविदा इरफ़ान!जाने का भी क्या समय चुना यार? अलविदा इरफ़ान!

जाने का भी क्या समय चुना यार? अलविदा इरफ़ान!

लॉकडाउन घोषित होने से तक़रीबन बारह पंद्रह दिन पहले निर्माता दिनेश विजान की फ़िल्म ‘अंग्रेजी मीडियम’ की स्पेशल स्क्रीनिंग में…

5 years ago
मौत और मोहब्बत की संगत में एक विकट सफ़रमौत और मोहब्बत की संगत में एक विकट सफ़र

मौत और मोहब्बत की संगत में एक विकट सफ़र

फ़रवरी के आख़िरी दिन थे. मौसम को उदास और झाड़ रूख को झंखाड कर देने वाली हवा चलने लगी थी…

5 years ago
शिक्षा जगत का बैल और खेतों का विद्यार्थी उर्फ़ भैया जीशिक्षा जगत का बैल और खेतों का विद्यार्थी उर्फ़ भैया जी

शिक्षा जगत का बैल और खेतों का विद्यार्थी उर्फ़ भैया जी

हम सब उम्र के उस दौर में थे जिसे वय:संधि कहते हैं और जिसके वर्णन के बहाने पुराने कवियों ने…

5 years ago
कोई कवि होय हमें क्या हानीकोई कवि होय हमें क्या हानी

कोई कवि होय हमें क्या हानी

वैसे कविता के नाम पर लोगों की खाल में भूसा भरने की भारत में लंबी परंपरा रही है. अगर याद…

5 years ago
गैंती पकड़ना सीख लेते तो भी कान्ट्रैक्ट की माहटरई से जादा कमातेगैंती पकड़ना सीख लेते तो भी कान्ट्रैक्ट की माहटरई से जादा कमाते

गैंती पकड़ना सीख लेते तो भी कान्ट्रैक्ट की माहटरई से जादा कमाते

साधो हम बासी उस देस के – 8 -ब्रजभूषण पाण्डेय (पिछली कड़ी : बावन सेज, तिरसठ आँगन, सत्तर ग्वालिन लूट…

6 years ago
बावन सेज, तिरसठ आँगन, सत्तर ग्वालिन लूट लिएबावन सेज, तिरसठ आँगन, सत्तर ग्वालिन लूट लिए

बावन सेज, तिरसठ आँगन, सत्तर ग्वालिन लूट लिए

साधो हम बासी उस देस के – 7 -ब्रजभूषण पाण्डेय (पिछली कड़ी : स्वस्थ बातचीत का वर्जित विषय ) साँकल…

6 years ago
नियति दानवी से लड़ कर विजेता राजकुमार बनने की कथाएंनियति दानवी से लड़ कर विजेता राजकुमार बनने की कथाएं

नियति दानवी से लड़ कर विजेता राजकुमार बनने की कथाएं

साधो हम बासी उस देस के – 5 -ब्रजभूषण पाण्डेय (पिछली कड़ी : बार्क मतलब खाली भौंकना नहीं होता उर्फ़ कैस्केडिंग…

6 years ago
बार्क मतलब खाली भौंकना नहीं होता उर्फ़ कैस्केडिंग इफ़ेक्ट की बारीकियांबार्क मतलब खाली भौंकना नहीं होता उर्फ़ कैस्केडिंग इफ़ेक्ट की बारीकियां

बार्क मतलब खाली भौंकना नहीं होता उर्फ़ कैस्केडिंग इफ़ेक्ट की बारीकियां

साधो हम बासी उस देस के – 4 -ब्रजभूषण पाण्डेय पिछली कड़ी : यह क्रांतिकारी दिन था मेला बीत चुका था.…

6 years ago
फ़िल्म इतनी इंटेंस है कि आपके वीकेंड का सारा मजा मूड ख़राब कर सकती हैफ़िल्म इतनी इंटेंस है कि आपके वीकेंड का सारा मजा मूड ख़राब कर सकती है

फ़िल्म इतनी इंटेंस है कि आपके वीकेंड का सारा मजा मूड ख़राब कर सकती है

ज़रा सोचें सच की तस्वीरों को आईने में हम उतारने चलें और तस्वीरें ही बोलने लगें, तो कैसा महसूस होगा…

6 years ago
यह क्रांतिकारी दिन थायह क्रांतिकारी दिन था

यह क्रांतिकारी दिन था

साधो हम बासी उस देस के – 3 -ब्रजभूषण पाण्डेय टुच्ची और हमारी सारी उम्मीदें तो बस ग्रू के करम…

6 years ago