फोटो : अशोक पाण्डे
कुमाऊँ के पारंपरिक गांव या गौं के मकान घर या कुड़ी कहे जाते हैं. घरों की निचली मंजिल गोठ हुआ करती है जहां पशुओं को बांधा जाता है. गोठ के आगे चौड़े बरामदे को गोठमल कहा जाता है. मकान की पहली मंजिल को मज्यालो कहा जाता है. मज्यालो के आगे भी बरामदा होता है, अगर बरामदा खुला हुआ तो उसे छाजो कहते हैं और अगर बंद हुआ तो चाक कहा जाता है. क्योंकि मकान लम्बा हुआ करता है तो बरामदे की लम्बाई भी 60 फीट या उससे ज्यादा होती है. कभी-कभार पहली मंजिल के ऊपर भी एक और मंजिल हुआ करती है जिसे पंड कहा जाता है. (Structure of Traditional Houses of Kumaon)
मकान का पिछला हिस्सा प्रायः बंद होता है जिसे. दीवारें पत्थरों से चिनी जाती हैं और छत (पाखो) स्लेटी पत्थरों से बनी होती हैं. दरवाजे को खोली, कमरे को खंड (खन), स्वागत कक्ष के सामने वाले हिस्से को तिबारी, आंगन को चौक, लम्बे चौक को उटांगण या पटांगण, मकान के पिछले हिस्से को कुड़िया कहा जाता है. कई घरों की कतारबद्ध श्रृंखला बाखली कही जाती है. अलग मकानों का समूह टांड कहा जाता है. शाम की बैठकें जमाने के लिए बना लकड़ी का ऊंचा चबूतरा चौरा कहलाता है.
गांव-घरों में मवेशियों के रास्तों को गौणों और इंसानों के रास्तों को बाटो कहा जाता है. गांव से घरों में जाने वाले रास्ते अक्सर दो फीट चौड़े हुआ करते हैं जिन्हें पत्थरों से चिना जाता है. यह गली के बीच से तीन फीट ऊँचाई लिए हुए घरों के आंगन तक पहुँचता है. मकान की मुंडेर के पास यह पशुओं के बाड़े में प्रवेश करता है.
(हिमालयन गजेटियर : एडविन टी. एटकिंसन के आधार पर)
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