कला साहित्य

लोककथा : पैसा सबकुछ कर सकता है


एक बार एक बहुत रईस शहजादे ने राजा के महल के ठीक सामने उससे भी शानदार एक महल बनवाने का निश्चय किया. महल जब बनकर पूरा हो गया तो उसने सामने की तरफ बड़े-बड़े अक्षरों में लिखवा दिया कि ‘पैसा सबकुछ कर सकता है.’ (Story of Italo Calvino)

राजा ने बाहर आकर जब इसे देखा तो फौरन शहजादे को बुला भेजा जो शहर में अभी नया ही था और अभी तक उसने दरबार में हाजिरी नहीं बजाई थी.

‘मुबारक हो,’ राजा ने कहा. ‘तुम्हारा महल तो सचमुच अजूबा है. उसके सामने मेरा गरीबखाना तो झोपड़ी जैसा लगता है. मुबारक! लेकिन यह लिखाना क्या तुम्हें ही सूझा था कि : पैसा सब कुछ कर सकता है?’

शहजादे ने महसूस किया कि शायद वह हद पार कर गया था.

‘जी हाँ यह मेरा ही खयाल था,’ उसने जवाब दिया, ‘लेकिन जहाँपनाह को यदि यह नागवार लग रहा हो तो मैं उसे मिटवा देता हूँ.’

‘अरे नहीं, मुझे लगा कि यह तुम्हारा खयाल नहीं रहा होगा. मैं बस तुम्हारे मुँह से सुनना चाहता था कि इस बात से तुम्हारा क्या मतलब था. मिसाल के तौर पर क्या तुम्हें ऐसा लगता है कि अपने पैसों से तुम मुझे कत्ल भी करा सकते हो?’

शहजादे को लग गया कि वह कायदे से फँस चुका था.

‘मुझे माफ कीजिए हुजूर. मैं फौरन उन लफ्जों को मिटवा देता हूँ. और अगर आपको मेरा महल नापसंद हो तो बस हुक्म कीजिए, मैं उसे भी जमींदोज करवा दूँगा.’

‘नहीं, नहीं उसे वैसा ही बना रहने दो. लेकिन चूँकि तुम दावा करते हो कि एक पैसे वाला शख्स कुछ भी कर सकता है, मुझे यह साबित करके दिखाओ. अपनी बेटी से बात करने की कोशिश करने के लिए मैं तुम्हें तीन दिन का मौका देता हूँ. अगर तुम उससे बात करने में कामयाब रहे तो ठीक है, तुम्हारी उससे शादी करवा दी जाएगी. अगर नहीं. तो मैं तुम्हारा सर कलम करवा दूँगा. समझ गए?’

शहजादा इतना परेशान हो उठा कि उसका खाना, पीना और सोना तक हराम हो गया. रात-दिन वह सोचा करता कि वह कैसे अपनी गर्दन बचाए. दूसरे दिन तक तो उसे अपनी नाकामयाबी के प्रति इतना इत्मिनान हो चुका था कि वह अपनी वसीयत करने के बारे में सोचने लगा. उसके हालात भी नाउम्मीद करने वाले थे क्योंकि राजा की बेटी सौ पहरेदारों से घिरे किले में बंद रहती थी. किसी चिथड़े की तरह पीला और ढीला सा वह बिस्तर पर पड़े-पड़े अपनी मौत का इंतजार कर रहा था जब उसकी बूढ़ी दाई उससे मिलने आई. इस जर्जर बूढ़ी दाई ने उसे बचपन में खिलाया था और अब भी उसके यहाँ काम कर रही थी. उसका मरियल सा चेहरा देखकर इस बूढ़ी औरत ने पूछा कि क्या गड़बड़ थी. हकलाते हुए शहजादे ने उसको पूरी कहानी कह सुनाई. कहानी : रुका हुआ रास्ता

‘तो क्या हुआ?’ दाई ने कहा, ‘तुम इस तरह उम्मीद छोड़े बैठे हो? तुम पर तो मुझे हँसी आ रही है. देखो मैं क्या कर सकती हूँ!’

वह डगमगाते कदमों से शहर के सबसे काबिल सुनार के पास पहुँची और उससे ठोस चाँदी का एक हंस बनाने के लिए कहा जो अपनी चोंच खोले-बंद करे. हंस को आदमकद और अंदर से खोखला होना था. ‘और हाँ यह कल तक तैयार हो जाना चाहिए,’ उसने जोड़ा.
‘कल? तुम होश में तो हो!’ सुनार चिल्लाया.

‘मैनें कहा न कल!’ उस बूढ़ी औरत ने सोने की अशर्फियों से भरा एक बटुआ निकाला और बोलती गई ‘जरा सोचो. यह पेशगी रकम है. बाकी तुम्हें कल मिल जाएगी जब तुम हंस तैयार करके मेरे सुपुर्द कर दोगे.’

सुनार हक्का-बक्का रह गया. ‘यही चीज तो है दुनिया में जिसकी बात ही और है,’ उसने कहा. ‘मैं कल तक हंस तैयार करने की भरसक कोशिश करूँगा.’

अगले दिन तक हंस तैयार हो गया और बहुत खूब तैयार हुआ.

बूढ़ी औरत ने शहजादे से कहा, ‘अपनी वायलिन लेकर हंस के भीतर बैठ जाओ. जैसे ही हम सड़क पर पहुँचें तुम वायलिन बजाने लगना.’
हंस के भीतर बैठा शहजादा वायलिन बजाता रहा और बूढ़ी दाई चाँदी के उस हंस को एक फीते के सहारे खींचती हुई शहर का चक्कर लगाने लगी. उसे देखने के लिए सड़कों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी : शहर में ऐसा कोई भी न बचा जो उस खूबसूरत हंस को देखने के लिए दौड़ा न आया हो. यह बात उस किले तक भी पहुँची जहाँ राजा की बेटी बंद थी, उसने अपने अब्बा हुजूर से बाहर निकलकर यह अनोखा दृश्य देखने की अनुमति माँगी.

राजा ने कहा, ‘उस शेखीबाज शहजादे को मिला मौका कल खत्म हो जाने दो. तब तुम बाहर निकलना और हंस देख लेना.’
लेकिन राजा की बेटी ने सुन रखा था कि कल तक हंस वाली बूढ़ी औरत चली जाएगी. इसलिए राजा ने हंस को किले के अंदर ले जाने दिया ताकि उसकी बेटी हंस को देख सके. बूढ़ी दाई को इसी बात की उम्मीद थी. जैसे ही शहजादी ने चाँदी के उस हंस के साथ अकेले में उसकी चोंच से निकल रहे संगीत का आनंद लेना शुरू किया, अचानक हंस खुल पड़ा और उसमें से एक नौजवान ने बाहर कदम रखा.
‘डरो मत,’ उस आदमी ने कहा, ‘मैं वही शहजादा हूँ जो अगर तुमसे बात न कर सका तो कल सुबह तुम्हारे अब्बा हुजूर मेरा सर कलम करवा देंगे. तुम उनसे यह बताकर मेरी जान बचा सकती हो कि तुम मुझसे बात कर चुकी हो.’

अगले दिन राजा ने शहजादे को बुला भेजा. ‘हाँ, तो क्या मेरी बेटी से बात करने में तुम्हारा पैसा तुम्हारे कोई काम आया?’

‘जी हाँ जहाँपनाह,’ शहजादे ने जवाब दिया.
‘क्या! तुम्हारा मतलब तुमने उससे बात किया?’
‘उसी से पूछ लीजिए.’

शहजादी आई और उसने बताया कि कैसे वह चाँदी के हंस में छुपा हुआ था जिसे खुद राजा के हुक्म पर किले में घुसने दिया गया था.
इस पर राजा ने अपना मुकुट उतारकर शहजादे के माथे पर रख दिया. ‘इसका मतलब तुम्हारे पास सिर्फ पैसा ही नहीं बल्कि एक अच्छा दिमाग भी है. जाओ खुश रहो! मैं अपनी बेटी का हाथ तुम्हारे हाथों में सौंपता हूँ.’

(एक इतालवी लोककथा पर आधारित इतालो काल्विनो की इस कहानी का अनुवाद मनोज पटेल ने किया है. मनोज पटेल के ब्लॉग padhte-padhte.blogspot.com से साभार)

इतालो काल्विनो (1923-1985) इतालवी पत्रकार और लेखक थे. उनका रचना संसार ऐसा है कि वहां प्रतिनिधि रचनाएं बताने जैसी सहूलियत नहीं है. जितना लिखा है सब प्रतिनिधि है.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Sudhir Kumar

Recent Posts

DK88 casino promo code payment methods for Malaysian players

What Is the DK88 Casino Promo Code?How To Claim The DK88 Casino Promo CodeUnderstanding The…

2 days ago

DK88 casino registration security guide for Malaysian players

Why Choose DK88? Licensing, Security and Local AppealStep‑by‑Step DK88 Casino Registration ProcessPreparing Your DocumentsCreating Your…

2 days ago

DK88 Casino Registration Steps and Methods for Malaysian Players

DK88 Casino Registration: Practical Guide for Malaysian Players Welcome to the ultimate walkthrough of DK88…

2 days ago

DK88 casino app mobile guide for Malaysian players

Getting Started: Registration & First StepsVerification and KYCNavigating the DK88 Casino App InterfaceKey Features at…

2 days ago

DK88 Malaysia Casino Bonus Guide: Full Breakdown of Welcome Offers

Why DK88 Malaysia Casino Stands OutRegistration & Getting StartedBonuses & PromotionsGame Selection – Slots, Live…

2 days ago

अब हल्द्वानी में पहाड़ी उत्पादों के सबसे विश्वसनीय ब्रांड ‘मुनस्यारी हाउस’ की शुरुआत

आपको मुनस्यारी की दुर्लभ राजमा कि तलाश है या फिर कुमाऊं-गढ़वाल के उच्च हिमालयी क्षेत्रों…

3 days ago