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सरोल विवाह पद्धति: बिना दूल्हे वाली बारात की परम्परा

उत्तराखंड का कुमाऊं अंचल अपनी अनूठी और प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाना जाता है. समय के साथ यहां के सामाजिक ताने-बाने और रीति-रिवाजों में कई बड़े बदलाव आए हैं. कुमाऊं के वैवाहिक इतिहास पर नजर डालें, तो गुजरे जमाने में यहां एक बेहद अनोखी विवाह प्रणाली प्रचलित थी, जिसे ‘सरोल विवाह पद्धति’ कहा जाता था.
(sarol marriage traditions of uttarakhand) 

स्थानीय बोलचाल में इस विवाह को ‘बढ़ा विवाह’ या ‘डोल विवाह’ के नाम से भी जाना जाता था. हालांकि, आधुनिक दौर में यह विवाह प्रथा कुमाऊं में अब प्रचलन में नहीं है, लेकिन इतिहास के पन्नों में दर्ज इसकी रस्में आज के दौर से बिल्कुल अलग और हैरान करने वाली थीं. 

सरोल विवाह पद्धति की मुख्य विशेषताएं

यह विवाह पद्धति आज के पारंपरिक विवाहों के मुकाबले बेहद सरल और अनूठी थी. इसके मुख्य नियम और रस्में कुछ इस प्रकार थीं:  बिना दूल्हे के बारात: इस विवाह की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि तय की गई तिथि को वर (दूल्हा) स्वयं बारात लेकर कन्या के घर नहीं जाता था. वर पक्ष के सगे-सम्बन्धी वर के बगैर ही कन्या के पितृगृह (मायके) जाया करते थे. चूंकि वर बारात में शामिल नहीं होता था, इसलिए उसके प्रतिनिधि के रूप में वर के पक्ष के लोग उसकी किसी भी निजी वस्तु को अपने साथ कन्या के पितृगृह ले जाते थे. विवाह के दौरान वह वस्तु ही वर का प्रतीक मानी जाती थी.  
(sarol marriage traditions of uttarakhand)

बिना किसी अनुष्ठान के विदाई

सामान्य तौर पर होने वाले भारी-भरकम पूजा-पाठ और धार्मिक विधानों के विपरीत, इस विवाह में वर पक्ष द्वारा बिना किसी अनुष्ठान के ही कन्या को उसके पितृगृह से विदा कराकर लाया जाता था. जहां आज के विवाहों में दूल्हा-दुल्हन के लिए मुकुट पहनना अनिवार्य माना जाता है, वहीं सरोल या डोल विवाह में दूल्हा-दुल्हन के सिर में मुकुट बांधने की कोई प्रथा प्रचलित नहीं थी. बदलते समय और सामाजिक चेतना के कारण वर्तमान में यह विवाह प्रथा कुमाऊं में प्रचलित नहीं है. आज के आधुनिक दौर में कुमाऊं अंचल में इस तरह के विवाह पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं.

वर्तमान में कुमाऊं में शादियां मुख्य रूप से मन्दिर विवाह और विस्तृत धार्मिक व मांगलिक रीति-रिवाजों से युक्त अंचल विवाह प्रणाली से ही संपन्न की जाती हैं. सरोल (डोल) विवाह आज कुमाऊं की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक सामाजिक व्यवस्था का एक दिलचस्प हिस्सा बनकर रह गया है.
(sarol marriage traditions of uttarakhand)

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