समाज

अल्मोड़ा के विख्यात चित्रकार नवीन वर्मा ‘बंजारा’ का निधन

अल्मोड़ा इंटर कालेज के प्रांगण में विवेकान्द की एक आदमकाय मूर्ति है. लगभग 70 के दशक में बनी इस मूर्ति के निर्माता का नाम है नवीन वर्मा ‘बंजारा’. आज सुबह उनका निधन हो गया. (Naveen Verma ‘Banjara’)

प्रकृति और संस्कृति से बेहद करीब से जुड़े नवीन वर्मा अपनी चित्रकारी के चलते देशभर में विख्यात हैं. उनकी चित्रकारी में उनका प्रकृति और अपने समाज से प्रेम खूब झलकता है. ऑयल और वाटर कलर पेंटिग के सिद्धहस्त इस चित्रकार की चित्रकारी में प्रकृति और समाज का अद्भुत सामंजस्य देखने को मिलता है.

प्रारंभिक शिक्षा के बाद नवीन वर्मा ने लखनऊ से अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की. जीवन भर जन सरोकार से जुड़े रहने वाले नवीन वर्मा सत्तर के दशक में उत्तराखंड लोक वाहिनी से भी जुड़े रहे.

नौकरी से रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अल्मोड़ा में अपने निवास स्थान पर ही एक स्टूडियो बनाया था. स्टूडियो के दरवाजे हर उस शख्सियत के लिये खुले थे जो सीखने की चाह रखता हो. उनके स्टूडियो में बहुत से युवाओं का आना जाना रहता.

युवाओं के साथ दिल खोल कर ज्ञान साझा करते और चित्रकारी और चित्रकारों पर खूब चर्चा करते. उनके स्टूडियों में अल्मोड़ा के बहुत से युवाओं ने चित्रकारी के अमूल्य बारीकियां सीखी हैं. इस स्टूडियो की स्थापना का उदेश्य ही युवाओं तक चित्रकारी की समझ को पहुँचाना था.

उत्तराखंड के जनकवि गिरीश तिवाड़ी, नवीन वर्मा को अपना गुरु बुलाते थे. नवीन वर्मा का गिरदा के साथ के बड़ा घनिष्ठ संबंध था. प्रगतिशील विचारधारा के चलते सामाजिक मंच पर दोनों को लोगों का खूब प्यार मिलता. (Naveen Verma ‘Banjara’)

–काफल ट्री डेस्क

काफल ट्री के फेसबुक पेज को लाइक करें : Kafal Tree Online

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

दुर्गम पहाड़ों तक कैसे पहुंचे महाराष्ट्र-गुजरात के पर्व

बचपन में हमें होली-दिवाली और राखी के अलावा मकर संक्रांति, घी त्यार और फूलदेई जैसे उत्सवों…

6 hours ago

पिथौरागढ़ में स्विट्ज़रलैंड बनने की है पूरी क्षमता

इस बार करीब 9 साल बाद पिथौरागढ़ जाकर एक बात साफ दिखी कि यहां कुछ…

5 days ago

अलमोड़े में नंदादेवी मेले की ताज़ा तस्वीरें

आस्था और विश्वास की प्रतीक श्री नंदा देवी की भक्ति में इन दिनों पूरा उत्तराखंड…

1 week ago

अहा! कैसा होता था नंदादेवी कौतिक

उत्तराखण्ड के पहाड़ों में मेले केवल मनोरंजन के अवसर नहीं रहे हैं. वे लोकजीवन की…

1 week ago

सागर से शिखर तक : स्वामी मन्मथन

पिछली कड़ी : बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की…

2 weeks ago

उत्तराखण्ड की महिलाएं : स्थितियों, संघर्षों और चुनौतियों का दस्तावेज

1970 के दशक का उत्तराखण्ड का ‘चिपको आंदोलन’ विश्वविख्यात है. यह तथ्य भी कमोबेश ज्ञात है कि…

2 weeks ago