फोटो : जगमोहन रौतेला
हिन्दू धर्म के अनुसार इन दिनों पितृ पक्ष चल रहा है. सोलह दिनों के इस पितृ पक्ष में अपने मृत माता-पिता को याद किया जाता है जिसे श्राद्ध कहा जाता है. (Navami Sraddha)
श्राद्ध वर्ष में दो बार होते हैं. एक उस तिथि को जिस दिन मृत्यु हुई हो और दूसरा पितृ पक्ष के दौरान. पितृ पक्ष में ईजा का श्राद्ध नवमी के दिन होता है. (Navami Sraddha)
हिन्दू धर्म के अनुसार पितृ पक्ष की नवमी के दिन, किसी भी मृत सुहागिन महिला का श्राद्ध होता है. नवमी के श्राद्ध (Navami Sraddha) का महात्म्य बहुत ज्यादा है.
पितृ पक्ष में नवमी के श्राद्ध का महत्त्व इसलिये अधिक क्योंकि इस दिन परिवार की सभी मृत महिलाओं को याद किया जाता है और उनका श्राद्ध किया जाता है. माताओं के श्राद्ध के कारण ही इसे मातृ नवमी कहा जाता है. इसे सौभाग्यवती श्राद्ध भी कहा जाता है.
इस वर्ष पितृ पक्ष की नवमी 23 सितम्बर यानि आज के दिन है. आज के दिन श्राद्ध करने का मुहूर्त सुबह सात बजकर पचास मिनट से लेकर सायं छः बजकर सैंतीस मिनट तक है.
इसीतरह एकादशी का दिन तिथि के हिसाब से मृतक हुए लोगों के अलावा सन्यासियों के श्राद्ध के लिए तय होता है. द्वादशी औत त्रयोदशी पर भी तिथि के हिसाब से श्राद्ध होते हैं और इसके अलावा बच्चे का श्राद्ध त्रयोदशी को किया जाता है. दुर्घटना में मारे गयों के लिए चतुर्दशी का दिन नियत है जबकि अमावस्या के दिन जिसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कहते हैं.
कुमाऊं क्षेत्र की मान्यतानुसार श्राद्ध पक्ष में कौवे दिवंगत परिजनों के हिस्से का खाना खाते हैं. कौवे को यमराज का दूत माना जाता है जो श्राद्ध में आकर अन्न की थाली देखकर यम लोक जाता है और हमारे पितृ को श्राद में परोसे गए भोजन की मात्रा और खाने की वस्तु को देखकर हमारे जीवन की आर्थिक स्थिति और सम्पन्नता को बतलाता है.
-काफल ट्री डेस्क
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