Categories: Featuredकॉलम

पितृ पक्ष में ईजा समेत परिवार की सभी मृत महिलाओं को याद करने का दिन है आज

हिन्दू धर्म के अनुसार इन दिनों पितृ पक्ष चल रहा है. सोलह दिनों के इस पितृ पक्ष में अपने मृत माता-पिता को याद किया जाता है जिसे श्राद्ध कहा जाता है. (Navami Sraddha)

श्राद्ध वर्ष में दो बार होते हैं. एक उस तिथि को जिस दिन मृत्यु हुई हो और दूसरा पितृ पक्ष के दौरान. पितृ पक्ष में ईजा का श्राद्ध नवमी के दिन होता है. (Navami Sraddha)

हिन्दू धर्म के अनुसार पितृ पक्ष की नवमी के दिन, किसी भी मृत सुहागिन महिला का श्राद्ध होता है. नवमी के श्राद्ध (Navami Sraddha) का महात्‍म्‍य बहुत ज्‍यादा है.

पितृ पक्ष में नवमी के श्राद्ध का महत्त्व इसलिये अधिक क्योंकि इस दिन परिवार की सभी मृत महिलाओं को याद किया जाता है और उनका श्राद्ध किया जाता है. माताओं के श्राद्ध के कारण ही इसे मातृ नवमी कहा जाता है. इसे सौभाग्यवती श्राद्ध भी कहा जाता है.

इस वर्ष पितृ पक्ष की नवमी 23 सितम्बर यानि आज के दिन है. आज के दिन श्राद्ध करने का मुहूर्त सुबह सात बजकर पचास मिनट से लेकर सायं छः बजकर सैंतीस मिनट तक है.

इसीतरह एकादशी का दिन तिथि के हिसाब से मृतक हुए लोगों के अलावा सन्यासियों के श्राद्ध के लिए तय होता है. द्वादशी औत त्रयोदशी पर भी तिथि के हिसाब से श्राद्ध होते हैं और इसके अलावा बच्चे का श्राद्ध त्रयोदशी को किया जाता है. दुर्घटना में मारे गयों के लिए चतुर्दशी का दिन नियत है जबकि अमावस्या के दिन जिसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कहते हैं.

कुमाऊं क्षेत्र की मान्यतानुसार श्राद्ध पक्ष में कौवे दिवंगत परिजनों के हिस्से का खाना खाते हैं. कौवे को यमराज का दूत माना जाता है जो श्राद्ध में आकर अन्न की थाली देखकर यम लोक जाता है और हमारे पितृ को श्राद में परोसे गए भोजन की मात्रा और खाने की वस्तु को देखकर हमारे जीवन की आर्थिक स्थिति और सम्पन्नता को बतलाता है.

-काफल ट्री डेस्क

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Girish Lohani

Recent Posts

सोशियल इकोनॉमी ऑफ हिमालय : हिमालय की सामाजिक अर्थव्यवस्था का आरंभिक अकादमिक अध्ययन

पिछली कड़ी : उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी…

2 days ago

कर्ज पर युधिष्ठिर का जवाब : लोककथा

बड़ी पुरानी बात है. पांडु राजा के पाँच पुत्र थे, पांडव और धृतराष्ट्र के सौ…

2 weeks ago

दिव्य आम का स्वाद जीभ पर नहीं पेट के सबसे चोर हिस्से पर कब्ज़ा जमाता है

हमारे इलाक़े में लंगड़ा आम अमूमन इन्हीं दिनों यानी जून के तीसरे-चौथे हफ़्ते में सलीके…

2 weeks ago

उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी

पिछली कड़ी : एटकिंसन : पहाड़ आधारित प्रशासन का निर्माता हिमालय को जानने समझने व…

1 month ago

एक ‘युवा’ एथलीट जिनकी उम्र 92 वर्ष है!

आम तौर पर एक उम्र के बाद व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से अशक्त, बेबस…

1 month ago

रिंगाल: पहाड़ की बुनावट में छिपा रोजगार और जीवन

पहाड़ों में जीवन हमेशा प्रकृति के साथ जुड़कर चला है. यहाँ जंगल सिर्फ पेड़ों का…

1 month ago