17 सितम्बर 2018 को शुरू हुआ 3 दिवसीय नन्दा देवी महोत्सव आज डोले के विसर्जन के साथ ही समाप्त हो गया. विसर्जन से पहले डोले को भव्य आयोजन के साथ पूरे शहर में घुमाया गया. कई सालों बाद इस बार पूरे मेले में एक भी दिन बारिश नहीं हुई है. कहा जा रहा है कि इससे पहले 1984 में ऐसा हुआ था कि पूरे मेले में एक भी बार बारिश न हुई हो. इस कार्यक्रम की भव्य तस्वीरें खींच कर भेजी हैं विनीता यशस्वी ने.
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
इस बार करीब 9 साल बाद पिथौरागढ़ जाकर एक बात साफ दिखी कि यहां कुछ…
आस्था और विश्वास की प्रतीक श्री नंदा देवी की भक्ति में इन दिनों पूरा उत्तराखंड…
उत्तराखण्ड के पहाड़ों में मेले केवल मनोरंजन के अवसर नहीं रहे हैं. वे लोकजीवन की…
पिछली कड़ी : बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की…
1970 के दशक का उत्तराखण्ड का ‘चिपको आंदोलन’ विश्वविख्यात है. यह तथ्य भी कमोबेश ज्ञात है कि…
पानी बरस रहा है. जब भी पानी बरसता है, देखता हूं पेड़-पौधे बहुत खुश हो जाते…