Featured

गढ़वाली राजा जिसके आदेश पर प्रजा अंग्रेजों की मुर्गियां और कुत्ते पालकी में ढ़ोती थी

गढ़वाली राजा सुदर्शन शाह की राजनैतिक और आर्थिक स्थिति शुरुआत में बहुत खराब थी. कनखल के युद्ध के बाद एक बात वह समझ गया था कि उसकी भलाई अंग्रेजों की भक्ति में ही है. भारत के अधिकांश छोटे राजाओं की तरह सुदर्शन शाह ने अपना जीवनकाल अंग्रेजों की भक्ति में ही बिताया.

टिहरी राज्य अभिलेखागार के एक रजिस्टर में 286 अंग्रेजों के नाम हैं, जिन्हें सुदर्शन शाह राजा बनने से पहले और बाद में मिला. गढ़वाल में जब कोई अंग्रेज शिकार खेलने आता तो राजा उसके शिकार खेलने या भ्रमण और उसकी सुख सुविधा का पूरा ध्यान रखता.

राजा ने अपने राजकर्मचारियों. जागीरदारों और थोकदारों के लिए कठोर आदेश दिया था

अंगरेज बहादुर की कुली बरदायश मा हाजर रहणों.

(टिहरी गढ़वाल राज्य इतिहास – 1)

इसका अर्थ था कि राज्य में आने वाले अंगरेजों की सामग्री ढ़ोने और उनकी भोजनव्यवस्था के लिये प्रस्तुत रहें. इस सामाग्री ढ़ोने में अंग्रेजों, उनकी मेमों व बच्चों के अतिरिक्त उनके मुर्गों और कुत्तों को भी पालकी, डंडी या कंडी में ढ़ोना पड़ता था.

जैसे ही कोई अंग्रेज श्रीनगर, ऋषिकेश, देहरादून या मसूरी की ओर से उसके राज्य में प्रवेश करता तो उसके और उसके परिवार का बोझा ढ़ोने के लिये वहां के परिवारों को उपस्थित रहना पड़ता. यह उनका एक अत्यावश्यक काम था. ऐसा न करने पर इसे राज्य के अंतर्गत दंडनीय अपराध माना जाता था.

सुदर्शन शाह ने अनेक मौकों पर लोगों को इस काम में छोटी से चूक होने पर दण्डित भी किया था.

वाट्सएप में पोस्ट पाने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online

-काफल ट्री डेस्क

तिलाड़ी गोलीकाण्ड के बाद क्या हुआ था उत्तराखंड के जनरल डायर चक्रधर जुयाल का
कोई नहीं चाहता कि तिलाड़ी आंदोलन पर बात हो
रंवाई, लोटे की छाप की मुहर और तिलाड़ी कांड

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Girish Lohani

Recent Posts

दुर्गम पहाड़ों तक कैसे पहुंचे महाराष्ट्र-गुजरात के पर्व

बचपन में हमें होली-दिवाली और राखी के अलावा मकर संक्रांति, घी त्यार और फूलदेई जैसे उत्सवों…

2 days ago

पिथौरागढ़ में स्विट्ज़रलैंड बनने की है पूरी क्षमता

इस बार करीब 9 साल बाद पिथौरागढ़ जाकर एक बात साफ दिखी कि यहां कुछ…

7 days ago

अलमोड़े में नंदादेवी मेले की ताज़ा तस्वीरें

आस्था और विश्वास की प्रतीक श्री नंदा देवी की भक्ति में इन दिनों पूरा उत्तराखंड…

1 week ago

अहा! कैसा होता था नंदादेवी कौतिक

उत्तराखण्ड के पहाड़ों में मेले केवल मनोरंजन के अवसर नहीं रहे हैं. वे लोकजीवन की…

1 week ago

सागर से शिखर तक : स्वामी मन्मथन

पिछली कड़ी : बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की…

2 weeks ago

उत्तराखण्ड की महिलाएं : स्थितियों, संघर्षों और चुनौतियों का दस्तावेज

1970 के दशक का उत्तराखण्ड का ‘चिपको आंदोलन’ विश्वविख्यात है. यह तथ्य भी कमोबेश ज्ञात है कि…

2 weeks ago