परम्परा

कुमाऊं में दीवाली का आखिरी दिन होता है आज

आज कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी का दिन है. उत्तराखंड के गावों में कार्तिक महीने की एकादशी बड़ी पावन मानी जाती है. पहाड़ों में आज का दिन पुरानी दीवाली, इगास, तुलसी एकादशी या बल्दिया एकादशी जैसे अनेक नामों से जाना जाता है.
(Kartik Ekadashi Tredtional Uttarakhand Festival)

आज का दिन जहां गढ़वाल में इगास पर्व के रूप में मनाया जाता है वहीं कुमाऊं मंडल में आज का दिन बूढ़ी दीवाली के रूप में मनाया जाता है. कुमाऊं में दीवाली कोजगर पूर्णमासी के दिन से शुरू मानी जाती है. कार्तिक महीने की एकादशी का दिन दीवाली का आखिरी दिन बूढ़ दीवाली के रूप में मनाया जाता है. माना जाता है कि आज दीवाली का पर्व पूरा हुआ.
(Kartik Ekadashi Tredtional Uttarakhand Festival)

कुमाऊं में कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन महिलायें व्रत करती हैं और सुबह के समय सूप में खील, दाड़िम, अखरोट आदि रखकर सूप को गन्ने के टुकड़े से ठक-ठक पीटते हुये कहती हैं-

आओ लक्ष्मी, बैठो नारायण, निकल घुइयां.

सूप के भीतर की ओर तो लक्ष्मी-नारायण की आकृति बनायी जाती है लेकिन बाहर की ओर घुइयां की आकृति बनाते हैं. घुइयां की आकृति में दो सिर, चार पैर बने होते हैं इनका मुख नहीं बनाया जाता. गोले-गोले घुमेरदार आकृति कर सर बनाते हो और कई लोग इसी में आँख भी बना देते हैं. इनके पैर पीछे की ओर बनाये जाते हैं. घुइयां को कुछ लोग भुइयां भी कहते हैं.    

उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में कार्तिक के महिने अन्य महीनों के मुकाबले काम कम रहता है. आने वाले महीने ठंड के महीने हैं सो गुनगुनी धूप का आनन्द भी कार्तिक के महीने से ही शुरू हो जाता है.       
(Kartik Ekadashi Tredtional Uttarakhand Festival)

काफल ट्री डेस्क

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