Featured

चतुर कमला और उसके आलसी पति की कहानी

बहुत पुराने समय की बात है, एक पंजाबी गाँव में कमला नाम की एक स्त्री रहती थी. उसका पति, एक नाई, बहुत आलसी था. वह दिन भर चौराहे पर बैठकर गप्पें मारना पसंद करता था, लेकिन काम बहुत कम करता था. इस वजह से वे दिन-ब-दिन गरीब होते गए, यहाँ तक कि एक दिन घर में खाना खरीदने तक के पैसे नहीं बचे.

नाई ने कहा, “आजकल काम ही नहीं है.”

कमला ने जवाब दिया, “यह तो हो सकता है, पर मैं भूखी नहीं मरने वाली. राजा महल में एक बड़ा भोज दे रहा है. तुम उनके पास जाकर कुछ माँग कर लाओ.”

नाई राजा के पास गया. महल की चमक-दमक देखकर वह घबरा गया और बोला, “महाराज, मुझे कुछ दे दीजिए… कुछ भी, जो आपको न चाहिए.”

राजा ने उसे गाँव के पास की एक बंजर जमीन दे दी. नाई खुश होकर घर लौट आया.

कमला ने जब सुना तो वह नाराज हो गई, “बंजर जमीन? इसे खाकर पेट भरूँ? अगर इसे जोतना है तो बैल और बीज कहाँ से लाएँगे?”

फिर, चतुर कमला ने एक योजना बनाई. अगले दिन वह और उसका पति उस बंजर जमीन पर गए और वहाँ रहस्यमय तरीके से जमीन में छड़ी चुभोने लगे, मानो कुछ ढूँढ रहे हों.

उन्हें ऐसा करता देख सात चोरों का एक गिरोह हैरान रह गया. उन्होंने सोचा कि ज़रूर इस जमीन में कोई खजाना है. एक चोर ने कमला से पूछा, “तुम यहाँ क्या कर रहे हो?”

कमला ने उसे बताया, “यह हमारे परिवार का रहस्य है. इस जमीन में सोने के पाँच बर्तन दबे हैं. कल हम इसे खोदने आ रहे हैं.”

यह सुनकर चोर बहुत खुश हुए. उसी रात, वे सारे चोर जमीन खोदने लगे. उन्होंने पूरी जमीन इतनी गहरी खोद डाली, जैसे सात बार हल चल गया हो, लेकिन उन्हें एक पैसा भी नहीं मिला. थके-हारे और निराश होकर वे चले गए.

अगले दिन कमला ने जमीन को अच्छी तरह जुता हुआ देखा तो बहुत खुश हुई. उसने एक दुकानदार से उधार बीज लेकर खेत में धान बो दिया. फसल बहुत अच्छी हुई. कमला ने सारा कर्ज़ चुका दिया, कुछ धान घर के लिए रखा और बाकी बेचकर एक बड़ा मटका भरकर सोने के सिक्के कमाए.

यह देखकर चोरों को बहुत गुस्सा आया. उन्होंने कमला से पैसे बाँटने को कहा, “हमने तो तुम्हारे लिए पूरा खेत खोद दिया!”

कमला हँसते हुए बोली, “मैंने सच कहा था, जमीन में सोना था! पर तुम उसे चुराना चाहते थे. मुझे उस सोने को पाने का तरीका आता था और तुम बदमाशों को एक पैसा नहीं मिलेगा!”

चोरों ने सोचा कि वे सोना चुरा लेंगे. एक शाम, एक चोर कमला के घर की खिड़की के नीचे छिप गया. कमला ने उसे देख लिया और जानबूझकर अपने पति से जोर से बोली, “सोना घर में नहीं है, मैंने उसे बाहर नीम की डाली पर लटका दिया है.”

चोर ने यह बात सुन ली और अपने साथियों को बता दी. रात को सारे चोर नीम के पेड़ पर चढ़ गए. उन्होंने देखा कि एक डाली पर कुछ लटक रहा है. असल में, वह भिड़ों का एक बड़ा छत्ता था, पर चाँदनी में वह सोने से भरा थैला लग रहा था.

एक चोर छत्ते के पास पहुँचा. जैसे ही उसने हाथ बढ़ाया, एक भिड़ ने उसे काट लिया. वह चिल्लाया और हाथ मारने लगा. नीचे खड़े चोरों ने सोचा कि वह सोने के सिक्के चुरा रहा है. एक-एक करके सारे चोर पेड़ पर चढ़ गए और सभी भिड़ों के काटने से चीखने-चिल्लाने लगे. आखिरकार, डाली टूट गई और सारे चोर नीचे गिर पड़े. भिड़ों ने उनका पीछा किया और वे भाग खड़े हुए.

कुछ दिनों तक चोर नहीं दिखे, पर वे बदला लेना चाहते थे. एक गर्म रात को, जब कमला और उसका पति घर के बाहर सो रहे थे, चोरों ने कमला की चारपाई उठा ली और उसे लेकर भागने लगे.

रास्ते में चोर एक पेड़ के नीचे रुके. इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते, कमला ने फुर्ती से पेड़ की एक डाली पकड़ी और चुपचाप पेड़ पर चढ़ गई. चोरों को लगा कि वह अब भी चारपाई पर सो रही है.

चोरों का सरदार पहरा देने लगा. तभी उसने पेड़ पर एक सफेद पोशाक में एक आकृति देखी. कमला ने अपना चेहरा ढक लिया था और वह धीरे-धीरे गाने लगी. चोर का सरदार समझा कि कोई परी है जो उस पर मोहित हो गई है.

वह पेड़ पर चढ़कर उसके पास पहुँचा. कमला ने एक बड़ा सा अनार तोड़ा और जैसे ही चोर ने मुँह खोला, उसे उसके मुँह में ठूँस दिया. चोर का मुँह बंद हो गया और वह लड़खड़ाकर नीचे गिर पड़ा.

दूसरे चोर जाग गए. तभी कमला ने जोर-जोर से आवाज़ें निकालनी शुरू कर दीं. चोर डर गए और समझे कि पेड़ में भूत है. वे सब वहाँ से भाग खड़े हुए.

कमला सुरक्षित पेड़ से उतरी, अपनी चारपाई सिर पर उठाई और घर वापस चली गई. उस दिन के बाद, वे चोर कभी लौटकर नहीं आए. और कमला अपनी समझदारी से अपने परिवार को समृद्ध बनाकर रही.

नोट : यह कहानी एक अंग्रेजी कथा संग्रह ‘KAMALA: FEMINIST FOLKTALES FROM AROUND THE WORLD’ से ली गई है, जिसके संकलनकर्ता एथेल जॉन्स्टन फेल्प्स हैं. यह कहानी दुनिया भर की ऐसी लोककथाओं को एकत्र करती है जिनमें महिलाएँ चतुर, साहसी और स्वावलंबी के रूप में दिखाई गई हैं.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी

पिछली कड़ी : एटकिंसन : पहाड़ आधारित प्रशासन का निर्माता हिमालय को जानने समझने व…

1 week ago

एक ‘युवा’ एथलीट जिनकी उम्र 92 वर्ष है!

आम तौर पर एक उम्र के बाद व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से अशक्त, बेबस…

1 week ago

रिंगाल: पहाड़ की बुनावट में छिपा रोजगार और जीवन

पहाड़ों में जीवन हमेशा प्रकृति के साथ जुड़कर चला है. यहाँ जंगल सिर्फ पेड़ों का…

1 week ago

हिमालय के गुमनाम नायक की कहानी

इस तस्वीर में आपको दिख रहे हैं "पंडित नैन सिंह रावत" — 19वीं सदी के उन महान…

4 weeks ago

भारतीय परम्परा और धरती मां

हमारी भारतीय परंपरा में धरती को हमेशा से ही मां कह कर पुकारा गया है. ‘माता…

1 month ago

एटकिंसन : पहाड़ आधारित प्रशासन का निर्माता

तत्कालीन नार्थ वेस्टर्न प्रोविनेंस यानी उत्तर प्रदेश के जिस ब्रिटिश अधिकारी ने उन्नीसवीं शताब्दी के…

1 month ago