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दुनिया के लालच को आईना दिखाया 16 साल की ग्रेटा ने

एक पंद्रह-सोलह साल की लड़की है जो यूरोप के एक अतिविकसित देश स्वीडन में रहती है. आप उम्मीद करते हैं वह अपनी किशोरावस्था के इस सबसे सुनहरे सालों में अपनी किसी भी हमउम्र की तरह फैशन, स्लैमबुक्स, सोशल मीडिया और तेज़ संगीत की दीवानी होगी.  

ग्रेटा थनबर्ग ऐसी-वैसी किशोरी नहीं है. दुनिया भर में फैले पर्यावरण-संकट को लेकर बहुत ईमानदारी और हिम्मत के साथ पिछले साल वह स्वीडन की संसद के बाहर अकेली विरोध प्रदर्शन करने बैठ गयी थी. उसकी वह तस्वीर दुनिया भर के मीडिया की सुर्ख़ियों में रही. उससे प्रेरणा लेकर दुनिया भर में अनेक स्कूली छात्रों ने विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत की जिसे ‘फ्राइडेज़ फॉर फ्यूचर’ का नाम दिया गया. उसके बाद ग्रेटा थनबर्ग ने संयुक्त राष्ट्र संघ की क्लाइमेट चेन्ज कांफ्रेंस को संबोधित किया जिसके परिणामस्वरूप यह आन्दोलन और मुखर होता गया है और अकेले 2019 में इस बैनर तले छात्रों के दो ऐसे प्रदर्शन हुए जिनमें भागीदारी करने वालों की संख्या दस लाख से अधिक थी.

3 जनवरी 2003 को जन्मी ग्रेटा थनबर्ग को ‘टाइम’ पत्रिका ने अपने कवर पर छापा. अनेक पत्रकारों ने उसे भविष्य की राजनेता भी बताया.

इसी ग्रेटा थनबर्ग ने कल अमेरिका के न्यूयार्क में चल रही संयुक्त राष्ट्र क्लाइमेट समिट में एक छोटा सा लेकिन हिला देने वाला भाषण दिया. संसार को समूल विनाश की कगार पर ला खड़ा करने में दुनिया की राजनीति और औद्योगिक लालच की भूमिका सबसे बड़ी रही है. भावनाओं से लबरेज अपने इस तारीखी भाषण में इन महाशक्तियों को आड़े हाथों लेते हुए ग्रेटा ने कहा:

“यह पूरी तरह से ग़लत है. मुझे यहां नहीं होना चाहिए था. मुझे महासागर पार स्कूल में होना चाहिए था. आपने अपनी खोखली बातों से मेरे सपने और बचपन छीन लिये, फिर भी मैं खुशकिस्मत लोगों में शामिल हैं. लोग त्रस्त हैं, लोग मर रहे हैं, पूरी पारिस्थितिकी ध्वस्त हो रही है. हम सामूहिक विलुप्ति की कगार पर हैं और आप पैसों के बारे में तथा आर्थिक विकास की काल्पनिक कथाओं के बारे में बातें कर रहे हैं. आपने साहस कैसे किया? युवाओं की सुनी जा रही है और तात्कालिकता को समझा जा रहा है. लेकिन मैं कितनी दुखी और गुस्से में हूं. क्योंकि क्या आपने सचमुच में हालात को समझा है और मुझे इस पर यकीन नहीं होता.”

“आपलोग हमें निराश कर रहे हैं. लेकिन युवाओं ने आपके विश्वासघात को समझना शुरू कर दिया है. भविष्य की पीढ़ियों की नजरें आप पर हैं और यदि आप हमें निराश करेंगे तो मैं कहूंगी कि हम आपको कभी माफ नहीं करेंगे.”

ग्रेटा का भाषण फिलहाल दुनिया भर में वाइरल होकर घूम रहा है. अपनी बात को कहते समय उसकी आवाज़ में गुस्सा और असहायता साफ झलक रहे हैं. बार-बार बह आ रहे उसके आंसू उसकी ईमानदारी और चिंता के सबसे बड़े गवाह हैं. होना तो यह चाहिए था कि उसके कहे के लिए वहीं मौजूद डोनाल्ड ट्रम्प ने उसे शाबाशी देनी चाहिए थी लेकिन अपनी एक ताज़ा ट्वीट में अमेरिका का यह बड़बोला राष्ट्रपति परोक्ष रूप से उसका मजाक उड़ाता है. इसके लिए ट्रम्प की छीछालेदर होनी शुरू भी हो गयी है.

समाज को बदलने की शुरुआत खुद से करनी होती है – इस कथन को ग्रेटा थनबर्ग के न सिर्फ साबित कर दिखाया है बल्कि वह बहुत थोड़े समय में दुनिया भर में विरोध की एक मजबूत प्रतीक बन कर उभरी है. उसका नाम नोबेल शान्ति पुरस्कार के लिए भी नामित हुआ है.

सलाम ग्रेटा थनबर्ग

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