तुलसी गैबर्ड
3 नवंबर 2020 को अमेरिका में राष्ट्रपति का 49 वा चुनाव संपन्न होगा आने वाला पूरा वर्ष अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रचार का मैराथन वर्ष होगा. जिसका प्रारंभ डोनाल्ड ट्रंप ने हाउडी मोदी कार्यक्रम के साथ कर भी दिया है. (Indians to play Key Role in American Elections)
इसे मात्र संयोग नहीं कहा जा सकता की डोनाल्ड ट्रंप हाउडी मोदी के बहाने इस चुनाव वर्ष में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं को रिझाने की कोशिश न कर रहे हों. डोनाल्ड ट्रंप जोकि 2016 में 30 लाख से अधिक पॉपुलर वोटों से चुनाव हारने के बाद 538 के निर्वाचक मंडल से 304 वोटों को पाकर अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए. यही कारण है की ट्रंप चुनावी प्रचार तंत्र के बेहतर बाजीगर माने जाते हैं. (Indians to play Key Role in American Elections)
डोनाल्ड ट्रंप जो कि पिछले चुनाव में अमेरिकी राष्ट्रवाद के घोड़े पर सवार होकर राष्ट्रपति के पद तक पहुंचे इस बार अमेरिकी राष्ट्रवाद का झंडा लहराते हुए दोबारा सत्ता पर काबिज होना उनके लिए एक बड़ी चुनौती है. इस चुनौती को आसान करने की गरज से ही भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का होसटन में अमेरिकी भारतीयों का एक सार्वजनिक कार्यक्रम “हाउडी मोदी ” का आयोजन किया गया. भारतीयों की दृष्टि से यह एक सफल कार्यक्रम था लेकिन इस कार्यक्रम का भारत से अधिक लाभ डोनाल्ड ट्रंप को चुनाव में मिलता दिखता है.
यूं तो अमेरिका में 62 मिलियन से अधिक गैर अमेरिकी मतदाताओं की संख्या है जो कि वर्षों से अमेरिका में रचे बसे हैं और अमेरिका की नागरिकता/वीजा प्राप्त हैं. अमेरिका के कुल आबादी 32 करोड़ 90 लाख से लगभग 24 करोड़ मतदाताओं के होने का अनुमान है इस प्रकार गैर अमेरिकी जो की जनसंख्या में 20% है और जब यह प्रतिशत मतदाता का आता है तो यह आंकड़ा 25% तक पहुंच जाता है. गैर अमेरिकी नागरिकों की अमेरिका में भूमिका को लेकर लंबे समय से दक्षिण पंथ की राजनीति करने वाले रिपब्लिकंस द्वारा सवाल उठाए जाते रहे हैं.जिन सवालों को डोनाल्ड ट्रंप ने बहुत तीखा व संकीर्ण करके उठाया जिसके कारण वह पिछले राष्ट्रपति चुनाव में लोकप्रिय मतदाताओं का चुनाव हारने के बाद भी विजयी हो गए और 2017 में डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के नागरिकता कानून में बहुत भारी बदलाव किए जिससे अमेरिका का h1b1 वीजा प्राप्त करना कठिन हो गया, वीजा प्राप्त करने की पहली शर्त अमेरिकी कंपनियों द्वारा नियुक्त की मांग होना रख दी गई. जिसके परिणाम स्वरूप अमेरिका की प्रवासी नागरिकों की संख्या में मात्र 3 वर्ष में 33% की कमी देखी गई, वर्ष 2015 में जहां अमेरिका में 84 मिलियन विदेशी नागरिक नागरिकता अथवा वीजा प्राप्त थे वहीं 2017 में यह संख्या घटकर 62 मिलियन आ गई. यहां भी सर्वाधिक नुकसान चीन को उठाना पड़ा जिसके 22.6 मिलियन नागरिक 2015 में अमेरिकी नागरिक थे, जो 2017 में घटकर 14 मिलियन पर आ गए. इस प्रकार चीन के नागरिकों में यह कमी 30% से अधिक है. हालांकि भारतीयों प्रवासियों की संख्या में इन वर्षों में भी कमी नहीं देखी गई, वर्तमान में भारत के 6 मिलियन प्रवासी नागरिक अमेरिका में निवास कर रहे हैं जिसमें से 5 मिलियन अमेरिका के मतदाता है भारतीयों का अमेरिका में मतदान का औसत 70% देखा जाता है इस लिहाज से 35 लाख भारतीयों के अपने मताधिकार का प्रयोग करने की संभावना है जो कि अमेरिका के कुल मतदान 13 करोड़ का लगभग 3% है.
इस प्रकार अमेरिका की राजनीति में 3% से अधिक भारतीय मतदाताओं की भागीदारी है, जो कि अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. कुल प्रवासी मतों की संख्या में भारतीय प्रवासियों की मतों की संख्या 10% हो जाती है और अमरीकी राजनीति में सक्रियता भारतीयों की बडी़ पहचान है,इस कारण अमेरिका की राजनीति में भारत का महत्व लगातार बढ़ रहा है.
डेमोक्रटस की संभावना : डोनाल्ड ट्रंप का रुझान लोकतांत्रिक और प्रगतिशील निर्णयों की तरफ नहीं है. उनके द्वारा अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने की गरज से स्वास्थ्य सेवा और विदेशी रोजगार पर बड़ी कैंची चलाई गई है. इस कारण 1-प्रोटेक्शन ऑफ पेशन्ट एंड अफॉर्डेबल केयर एक्ट 2017, और 2- टैक्स कट एंड जॉब एक्ट 2017 जैसे कठोर कानून लाए गए.
इस वर्ष राष्ट्रपति चुनाव के लिए यह दोनों कानून डेमोक्रेट्स का प्रमुख मुद्दा रहने वाले है.
इन अलोकप्रिय कानूनों के कारण 2018 के मध्यावधि चुनाव में हाउस ऑफ कॉमंस के 435 सीटों से 350 सीट पर डेमोक्रेट्स अपना कब्जा जमाने में कामयाब हुए हालांकि सीनेट में अभी भी रिपब्लिकन का बहुमत है.
राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेट प्रत्याशी तुलसी गैबार्ड हालांकि भारतीय मूल की नहीं है. लेकिन उन्होंने बहुत पहले हिंदू धर्म अपनाया है. जब वह हो हाउस ऑफ कॉमंस तथा सीनेट के लिए चुनी गई तो उनके द्वारा शपथ एक हाथ में गीता पकड़ कर ली गई.इस प्रकार हिंदू धर्म के प्रति उनकी आस्था बहुत गहरी है और अमेरिकी भारतीयों के बीच उनके लोकप्रिय होने का भी यह बड़ा कारण है. तुलसी गैबार्ड बहुत मुखर और प्रगतिशील महिला है जिनका नारा युद्ध और नफरत के खिलाफ “लीड विद लव” है.
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के प्रधानमंत्री का संयुक्त सार्वजनिक कार्यक्रम तुलसी गैबार्ड के पक्ष में झुक रहे भारतीयों की काट के रूप में देखा जा रहा है.
तुलसी गैबार्ड अगर चुनी जाती हैं. तो वह अमेरिका की न केवल पहली महिला राष्ट्रपति होंगी बल्कि पहली हिंदू अमेरिकन राष्ट्रपति होने के साथ ही सबसे कम उम्र 39 वर्ष में राष्ट्रपति चुने जाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम करेंगी.
इन सब कारणों से अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में भारतीय मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है.
प्रमोद साह
हल्द्वानी में रहने वाले प्रमोद साह वर्तमान में उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत हैं. एक सजग और प्रखर वक्ता और लेखक के रूप में उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफलता पाई है. वे काफल ट्री के नियमित सहयोगी.
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