यात्रा पर्यटन

उत्तराखंड के युवकों ने पेश की एकता की अनूठी मिसाल

जैसा कि देखा जा रहा है कि देश मे इस वक़्त असहिष्णुता का माहौल है और लगभग रोज ही अलग अलग धर्मो के लोगो के आपसी झगड़ो की खबरे आना आम सी बात हो गयी है . ऐसे समय मे उत्तराखंड के चार युवकों ने, जो कि आपस मे घनिष्ठ मित्र हैं और पेशे से फोटोग्राफर भी हैं और इत्तेफाक से चारो अलग अलग धर्मो से ताल्लुक़ रखते है, एक अनूठा कार्य कर दिखाया. इन चारों के नाम हैं – अमित साह (हिन्दू, 37, नैनीताल), कमाल खावर (मुस्लिम, 43, अल्मोड़ा), हृदयपाल सिंह खेड़ा (सिख, 23, बाजपुर) और सूरज एहरन सिंह (ईसाई, 37, नैनीताल). ध्यान रहे कि इनमें से अमित साह काफल ट्री के नियमित सहयोगी हैं और उनके अद्भुत चित्र हमारे अनेक आलेखों के हिस्से बनते रहे हैं. (Four Photographers Four Religions One Destination)

 कुछ समय पहले इन चारों ने मिलकर उत्तराखंड के उच्च हिमालय में व्यास घाटी में मौजूद ॐ पर्वत और आदि कैलाश की यात्रा करने का फैसला किया . इस यात्रा का मुख्य मकसद  देश की जनता को एकता का संदेश देना था. (Four Photographers Four Religions One Destination)

समुद्र तल से 15000 फिट तक की ऊंचाई तक का रोमांचक सफर एक साथ पूरा करने में इन्हें 14 दिन का वक़्त लगा. इसमें इन्होंने 157 किलोमीटर की यात्रा पैदल चलकर और लगभग 600 किलोमीटर की यात्रा गाड़ी द्वारा की. 10 सितंबर से शुरू हुई ये यात्रा 23 सितंबर को धारचूला पहुँचकर पूरी हुई. उत्तराखंड के अलग अलग जगहों से ये चारो अल्मोड़ा एकत्र हुए और फिर वहाँ से धारचूला तक गाड़ी में गए और उनके बाद आगे का सफर पैदल चलकर किया.

इन चारों ने जिस तरह साथ मिलकर इस कठिन यात्रा को आसानी से पूरी किया उसी तरह देशवासी भी साथ मिलकर देश को आगे ले जाने का काम करें, यही संदेश ये चारो सभी देशवासियों को देना चाहते हैं.

इन चारों के द्वारा हासिल की गयी इस अद्वितीय उपलब्धि को समाज के सभी वर्गों से सराहना मिल रही है.

– अमित साह द्वारा भेजी गयी जानकारी के आधार पर. सभी फोटो: अमित साह.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

कानिया के प्रेम में दीवानी सुबनी : लोककथा

रात ढलते ही जब सुबनी और लाली दोनों बहनें पानी भरने के लिए गाँव के…

3 days ago

चीड़ की छाल को कलाकृतियों का रूप दे रहा एक कलाकार

चीड़ के जंगल उत्तराखण्ड के कुमाऊं व गढ़वाल क्षेत्र में 900 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर बहुतायत में पाये…

3 days ago

मेरी यादों का पहाड़ : एक बहुआयामी किताब

2013 सन् में नेशनल बुक ट्रस्ट ने देवेन्द्र मेवाड़ी की किताब 'मेरी यादों का पहाड़' छापकर सराहनीय…

3 days ago

पहाड़ की पुकार जो खींच ले गई मुझे

नौ साल बाद पिथौरागढ़ जा रहा था. पिछले कुछ वर्षों में जब भी छुट्टी मिली, बेटी…

7 days ago

‘मनिला डांडे की देवी मां आज बहुत उदास है

देवी मां उदास है परन्तु परलोक गया पुत्र आज भी यादों में आकर उसको हिम्मत…

7 days ago

सोशियल इकोनॉमी ऑफ हिमालय : हिमालय की सामाजिक अर्थव्यवस्था का आरंभिक अकादमिक अध्ययन

पिछली कड़ी : उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी…

1 week ago