फोटो : अमित साह
उत्तरकाशी जिले में मुख्यालय से 100 किमी की दूरी पर गंगोत्री धाम स्थित है. पौराणिक मान्यता अनुसार गंगा धरती पर यहीं अवतरित हुई थी.
भागीरथी नदी के तट पर स्थित यह मंदिर चार धाम यात्रा में यमनोत्री के बाद आता है. गंगोत्री से 19 किमी की दूरी पर स्थित गोमुख ग्लेशियर को ही गंगा का उद्गम स्थल माना जाता है.
स्थान पर शंकराचार्य ने गंगा की मूर्ति स्थापित की थी जहां गोरखा सेनापति अमर सिंह ने अठारहवीं सदीं में मंदिर का निर्माण कराया.
नवरात्र के प्रथम दिन गंगोत्री धाम के कपाट खुलने का शुभ मुहूर्त निकाला जाता है. प्रत्येक वर्ष शीतकाल में गंगोत्री धाम के कपाट बंद हो जाते हैं. इसके बाद गंगा का डोला उसके शीतकालीन प्रवास पर ले जाया जाता है.
फोटो : अमित साह
गंगा अपने शीतकालीन प्रवास के दौरान मुखबा गांव में रहती है. मुखबा गांव का एक अन्य नाम मुखवास गांव भी है. पूरे शीतकाल में गंगा की मूर्ति यहीं रहती है.
इस वर्ष 7 मई को गंगोत्री के कपाट खुलेंगे. सात मई को कर्क लग्न रोहिणी नक्षत्र के शुभ मुहूर्त में 11.30 बजे गंगोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे. यह महूर्त वैदिक पंचाग के अनुसार निकाला जाता है.
इससे पहले दिन मुखबा से मां गंगा का डोला उठेगा. छः मई को दिन में शुभ मुहूर्त के अनुसार मां गंगा का डोला उठेगा और गंगोत्री को रवाना होगा. रात के समय विश्राम भैरोघाटी स्थित भैरव के मंदिर में किया जायेगा.
भैरवघाटी स्थित भैरव मंदिर से सुबह के समय शुभ मुहूर्त पर डोला गंगोत्री धाम की ओर रवाना होगा.
– काफल ट्री डेस्क
वाट्सएप में काफल ट्री की पोस्ट पाने के लिये यहाँ क्लिक करें. वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री के फेसबुक पेज को लाइक करें : Kafal Tree Online
इन्हें भी पढ़िये :
ऐतिहासिक स्याल्दे बिखौती मेले की तस्वीरें
पार्वती की ख़ुशी है फुल्यारी की संग्रांद
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
पहाड़ के एक छोटे-से गाँव में एक पिता रहता था. उम्र अब ढलने लगी थी,…
सांस्कृतिक परम्परा की दृष्टि से उत्तराखण्ड एक समृद्ध राज्य है. समय-समय पर यहां के कई…
जाने-माने पत्रकार, साहित्यकार और फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी से कल शाम मुलाकात हुई. दरअसल,उनके निर्देशन में…
उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा के मुख्य आकर्षण में से एक रामलीला का मंचन इन…
लोग इसे पहाड़ और पलायन की कहानी की तरह देखेंगे. लोग इसे खंडहर होते जा…
पिछली कड़ी : सागर से शिखर तक : स्वामी मन्मथन संघर्षनामा का ये किस्सा आजादी…