Featured

2019 में गंगोत्री धाम के कपाट खुलने की तिथि

उत्तरकाशी जिले में मुख्यालय से 100 किमी की दूरी पर गंगोत्री धाम स्थित है. पौराणिक मान्यता अनुसार गंगा धरती पर यहीं अवतरित हुई थी.

भागीरथी नदी के तट पर स्थित यह मंदिर चार धाम यात्रा में यमनोत्री के बाद आता है. गंगोत्री से 19 किमी की दूरी पर स्थित गोमुख ग्लेशियर को ही गंगा का उद्गम स्थल माना जाता है.

स्थान पर शंकराचार्य ने गंगा की मूर्ति स्थापित की थी जहां गोरखा सेनापति अमर सिंह ने अठारहवीं सदीं में मंदिर का निर्माण कराया.

नवरात्र के प्रथम दिन गंगोत्री धाम के कपाट खुलने का शुभ मुहूर्त निकाला जाता है. प्रत्येक वर्ष शीतकाल में गंगोत्री धाम के कपाट बंद हो जाते हैं. इसके बाद गंगा का डोला उसके शीतकालीन प्रवास पर ले जाया जाता है.

फोटो : अमित साह

गंगा अपने शीतकालीन प्रवास के दौरान मुखबा गांव में रहती है. मुखबा गांव का एक अन्य नाम मुखवास गांव भी है. पूरे शीतकाल में गंगा की मूर्ति यहीं रहती है.

इस वर्ष 7 मई को गंगोत्री के कपाट खुलेंगे. सात मई को कर्क लग्न रोहिणी नक्षत्र के शुभ मुहूर्त में 11.30 बजे गंगोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे. यह महूर्त वैदिक पंचाग के अनुसार निकाला जाता है.

इससे पहले दिन मुखबा से मां गंगा का डोला उठेगा. छः मई को दिन में शुभ मुहूर्त के अनुसार मां गंगा का डोला उठेगा और गंगोत्री को रवाना होगा. रात के समय विश्राम भैरोघाटी स्थित भैरव के मंदिर में किया जायेगा.

भैरवघाटी स्थित भैरव मंदिर से सुबह के समय शुभ मुहूर्त पर डोला गंगोत्री धाम की ओर रवाना होगा.

– काफल ट्री डेस्क

वाट्सएप में काफल ट्री की पोस्ट पाने के लिये यहाँ क्लिक करें. वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री के फेसबुक पेज को लाइक करें : Kafal Tree Online

इन्हें भी पढ़िये :

झूठे का मंदिर चम्पावत

आदि बद्री मंदिर की तस्वीरें

ऐतिहासिक स्याल्दे बिखौती मेले की तस्वीरें

पार्वती की ख़ुशी है फुल्यारी की संग्रांद

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Girish Lohani

Recent Posts

कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा

कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है,…

2 weeks ago

बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार

पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…

2 weeks ago

आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”

पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…

2 weeks ago

भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्

ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…

2 weeks ago

उत्तराखण्ड के सरोवर

उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…

2 weeks ago

दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध

पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…

2 weeks ago