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टनकपुर-बागेश्वर रेलवे मार्ग के नाम पर दशकों से ठगे जा रहे कुमाऊं के लोग

कुछ दिन पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने फेसबुक पेज पर रेलमंत्री पीयूष गोयल के साथ इस तस्वीर साझा करते हुये पहली पंक्ति में लिखा कि

केन्द्रीय रेल मंत्री श्री Piyush Goyal जी से भेंट कर टनकपुर-बागेश्वर रेल लाईन को इसी वित्तीय वर्ष में स्वीकृत करने का अनुरोध किया है. कुमाऊं के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में आवागमन सुगम बनाने में यह रेल लाइन लाइफ लाइन बन सकेगी.

ये तो रही साल 2019 की बात अब एक नज़र 2018 में उत्तराखंड सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के फेसबुक पेज की एक पोस्ट पर

एक साल में दोनों नेताओं के कपड़े और हाथ में गुलदस्तों का रंग बदला है बांकी बात वही है. ऐसा नहीं कि त्रिवेंद्र सिंह रावत ऐसा करने वाले उत्तराखंड के पहले मुख्यमंत्री हैं.

पिछले 18 सालों में जब कभी केंद्र का बजट बनता है उत्तराखंड सरकार अपनी एक मांग को लेकर केंद्र के पास पहुंच जाती है टनकपुर-बागेश्वर रेलवे मार्ग का निर्माण जिसका जवाब केंद्र कभी नहीं देती है.

टनकपुर-बागेश्वर रेलवे मार्ग का कितना महत्त्व है इस बात से समझा जा सकता है कि अंग्रेजों ने इस रेल लाइन को बिछाने के लिये सर्वे 1912 में ही करा दिया था लेकिन उस समय प्रथम विश्व युद्ध शुरु होने के चलते यह सर्वे ठंडे बस्ते में रहा जो फिर हमेशा वहीं पड़ा रहा. उत्तराखंड की राजनीति में कुमाऊं से आज तक शायद ही ऐसा कोई नेता हुआ हो जिसने टनकपुर-बागेश्वर रेलवे मार्ग राग न गाया हो.

टाइम्स ऑफ़ इण्डिया में छपी एक खबर के अनुसार कुमाऊं यूनिवसिर्टी में भूगोल के प्रोफेसर जी. एल. साह ने टनकपुर-बागेश्वर रेलवे मार्ग पर शोध किया है. बागेश्वर के रहने वाले प्रोफेसर जी. एल. साह की रिपोर्ट के अनुसार यह रेलवे लाइन 137 किमी लम्बी होगी जिसमें 67 किमी अन्तराष्ट्रीय सीमा से लगी होगी. इस रेलवे लाइन में चार स्टेशन होंगे. साह की रिपोर्ट के अनुसार इस रेलवे लाइन में एक टनल और चार पुल की आवश्यकता है. साह ने अपनी पूरी रिपोर्ट 2008 में राज्य और केंद्र सरकार को सौंप दी थी.

वर्तमान में जहां मुख्यमंत्री रेलवे लाइन की मांग करने रेलवे मंत्री के पास गये हैं वहीं पर केंद्र सरकार, नेपाल सरकार के साथ मिलकर पंचेश्वर बांध बनाने की योजना बना रही है. जिसका मुख्यमंत्री समेत उत्तराखंड के अधिकांश मंत्री सार्वजनिक मंचों पर समर्थन कर चुके हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री ही बता सकते हैं कि अबी बागेश्वर रेलवे लाइन पंचेश्वर बांध से बनी झील के नीचे बिछेगी या ऊपर.

-काफल ट्री डेस्क

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