Featured

लेट्स गो डच – अंग्रेज़ी भाषा का एक पहलू ये भी

कॉक्नी लन्दन के कामगारों की विचित्र लेकिन कल्ट बन चुकी भाषा है. इतिहास की दृष्टि से आमतौर पर मज़दूरों के साथ जोड़ कर देखा जाने वाला अंग्रेज़ी का यह संस्करण कहीं न कहीं पिछले सौ-पचासेक सालों से अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंची आधुनिक ब्रिटिश विट और ह्यूमर की जड़ों में है.

लन्दन के ईस्ट एन्ड इलाके में रहने वाले कामगारों की भाषा के तौर पर वि/(कु) ख्यात इस ज़बान की जड़ों तक जाने का रास्ता चौदहवीं सदी के विलियम लैंगलैन्ड और ज्यौफ़्री चॉसर जैसे लोगों की रचनाओं में खोजा जा सकता है. दीगर है कि ‘कैन्टरबरी टेल्स’ लिख चुके ज्यौफ़्री चॉसर को अंग्रेज़ी कविता का पितामह माना जाता है. कॉक्नी शब्द का उद्‍गम coken (यानी मुर्गा) और ey (यानी अंडा) में निहित माना जाता है. इसका अर्थ होता था एक बेडौल और छोटा अंडा यानी कम ज्ञानी इन्सान.

औद्योगिक क्रान्ति के ज़माने में शहर से आए लोगों को गांवों में बहुत खराब और अनपढ़ माना जाता था क्योंकि वे न तो अपनी जड़ों से किसी भी स्तर पर जुड़े रह सके थे न कुछ नया सीख सके थे जो उन्हें ‘जीने’ में मदद करता. वे भाषाई तौर पर भी दीवालिया हो चुके थे. ‘अ क्लासिकल डिक्शनरी ऑफ़ द वल्गर टंग’ में फ़्रान्सिस ग्रोस एक क़िस्सा बयान करते हैं: “लन्दन का एक बाशिन्दा गांव पहुंचकर एक घोड़े को हिनहिनाता हुआ सुनता है और कहता है – ‘आप ने सुना किस तरह हंसा यह घोड़ा?’ एक राहगीर ने उसे ठीक करते हुए बताया कि घोड़ा हंसता नहीं ‘हिनहिनाता’ है. अगली सुबह कौवे की कांवकांव सुनकर ये लन्दननिवासी साहब बोल उठे – ‘अरे सुनो कौवा हिनहिना रहा है'”

हो सकता यह एक फ़ैब्रिकेटेड क़िस्सा हो पर लब्बोलुबाब यूं है कि शहरों और ख़ासतौर पर लन्दन में रहने वालों की भाषा का क़स्बाई और ग्रामीण इंग्लैंड में बहुत मज़ाक उड़ाया जाता था.

कालान्तर में लन्दन के कुछेक हिस्सों में सीमित कॉक्नी भाषा बोलने वाले लोग शहर के अन्य हिस्सों में भी बसे और बीसवीं सदी की शुरुआत से एक विशिष्ट तबके में, प्रमुखतः युवाओं में यह भाषा चल निकली.

इसका व्याकरण बहुत विचित्र है लेकिन इस में जिस तरह के भाषाई प्रयोग होते हैं वे बचपन से अंग्रेज़ी पढ़्ने को अभिशप्त लोगों (उसे एक अलग तरह से पसन्द करने वालों) के लिए बेहद मनभावन और मनोरंजक होते हैं.

कुछ उदाहरण देखिये:

1. Would you Adam and Eve it? (क्या तुम इस बात पर यक़ीन करोगे?)

2. He’s half-inched me motah (motor). (उस ने मेरी गाड़ी चुरा ली है.)

3. You are in a right old two and eight. (तुम बुरे फंस गए हो गुरू!)

4. He is a bit Radio rental. (वह पिकनिक के वास्ते कुछ सैन्डविच बना लाया है.)

5. He’s lost his marbles. (उसका दिमाग फिर गया है.)

6. Let’s go Dutch. (यारी पक्की खर्चा अपना अपना.)

7. Lets have a butchers at the paper. (ज़रा कगज़ पत्तरों पर निगाह मार ली जावे.)

8. Mom-in-law is brown bread now! (सासू लपक लीं! यानी स्वर्ग सिधार गईं!)

9. Why do you become Brahms and Liszt everytime we chillout? (हमारी हर दावत-पार्टी में तू टल्ली
क्यूं हो जाता है यार?)

10. Who’s that China Plate? (ये नया कौन है बे?)

– अशोक पाण्डे

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

1 week ago

जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि

भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…

1 week ago

आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’

उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…

1 week ago

द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा

‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म…

2 weeks ago

हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता

कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था…

2 weeks ago

पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया

बीते दिन सुबह लगभग चार बजे एक ऐसी खबर आई जिसने कौसानी और लक्ष्मी आश्रम…

2 weeks ago