कॉलम

उत्तराखंड में वन्यजीव संघर्ष, पर्यावरण और समाज का मिश्रित सवाल

गढ़वाले मा बाघ लागो,बाघ की डरा… ब्याखूली ए जये घर चैय्ला, अज्याल बाघ की भै डर… गढ़वाल का लोकगीत हो…

6 years ago

मदारी: हिन्दुस्तानी सड़कों पर खेली जाने वाली एक कहानी

डुगडुगी की गड़गड़ाहट हवा में बुलंद हुई तो बाजार की सड़क पर गुज़रते राहगीरों का ध्यान अनायस ही उस ओर…

6 years ago

शैलेश मटियानी की जन्मतिथि पर भावपूर्ण स्मरण

दुख ही जीवन की कथा रहीक्या कहूँ आज जो नहीं कही निराला जी की ये पंक्तियाँ जितनी हिंदी काव्य के…

6 years ago

उत्तराखंड की वनराजी जनजाति पर जमीनी रपट

उत्तराखंड की पांच जनजातियों थारू, बोक्सा, भोटिया, जौनसारी और वनराजी में संभवतः सबसे पिछड़ी और कम जनसंख्या वाली जनजाति है…

6 years ago

मैमूद: शैलेश मटियानी की कालजयी कहानी

महमूद फिर ज़ोर बाँधने लगा, तो जद्दन ने दायाँ कान ऐंठते हुए, उसका मुँह अपनी ओर घुमा लिया. ठीक थूथने…

6 years ago

मासी: ऊंचे कैलास में खिलने वाला हिमालय के देवी-देवताओं का प्रिय फूल

मासी, रैमासी, जटामासी किसी भी नाम से पुकार लीजिये इसकी महक कम न होगी. पहाड़ के अनेक लोकगीतों में इसके…

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टीवी है ज़रूरी: उमेश तिवारी ‘विश्वास’ का व्यंग्य

एक ज़माने में जब मुल्क में टी वी अवतरित हुआ उसे दूरदर्शन के नाम से जाना गया. मालूम नहीं उसका…

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डड्वार: गढ़वाल की विलुप्त होती परम्परा

डड्वार, गढ़वाल में दिया जाने वाला एक प्रकार का पारितोषिक है. जिसे पहले तीन लोगों को दिया जाता था: ब्राह्मण,…

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हल्द्वानी के गट्टू भाई का बाघ से सामना

नई-नई शादी के पंद्रह दिन बाद उस रात गट्टू भाई की अपनी बीवी से पहली लड़ाई हुई. बीवी का लिहाज…

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प्रिय अभिषेक का चुटीला व्यंग्य ‘माचिस कहां है’

एक कप पानी. एक कप दूध. अरे गैस तो जलाई ही नहीं. माचिस कहाँ है? कहाँ है माचिस? गैस के…

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