कॉलम

उत्तराखंड की नई पीढ़ी नहीं पहचानती इस लोक वाद्ययंत्र को

उत्तराखंड लोक गीतों, लोक नृत्यों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों का खजाना है. उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों के वाद्य यंत्र हों या…

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बर्फबारी के मौसम में आंचरियों के टोले

पहाड़ों में भूत मसाण का खूब डर हुआ फिर परी, आचंरी, डेणी लगे ही रहने वाले हुये. बड़ों के लिये…

4 years ago

गढ़वाल के सामाजिक विकास के इतिहास में पूर्णानन्द नौटियाल का योगदान

बचपन में मिले अभावों की एक खूबी है कि वे बच्चे को जीवन की हकीकत से मुलाकात कराने में संकोच…

4 years ago

लाल बहादुर दाई उर्फ़ हनुमान क्वाड़ी

यूँ तो हमारे आसपास होने वाले घटनाक्रमों के बीच कई बार ऐसा भी होता है कि कोई अंजान शख़्सियत किसी…

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बर्फबारी के बाद पहाड़ियों का जीवन

सोशियल मीडिया की दुनिया में बर्फबारी देखकर हर किसी का दिल सैलानी बनकर पहाड़ में रहने का होता है. बर्फबारी…

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मकड़ू पधान की कहानी

अतीत पहाड़ों में वेगवान पवन और जलधाराओं के अतिरिक्त कुछ भी तो गतिमान नहीं है. सूरज तो उगता है पर…

4 years ago

पहाड़ों में ‘धिनाली’ और उससे जुड़ी लोक मान्यतायें

धिनाली कुमाऊनी का एक शब्द है जिसका सामान्य मतलब होता है- दूध, दही, घी, मठ्ठा, मक्खन आदि यानि दूध और…

4 years ago

बर्फबारी के बाद अल्मोड़ा शहर : फोटो निबंध

बर्फ का गिरना किसी उत्सव से कम नहीं. कुदरत के इस इख्तियार पर इंसान बहुत कुछ लूटा देने को तैयार…

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रिलकोट में तेज हवा की धार के बीच नर मेमनों का बधियाकरण

अस्थायी प्रवास हिमालय के चरवाहों के जीवन का अभिन्न हिस्सा होता है. ये चरवाहे पहिये की तरह साल भर मवेशियों,…

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थल के ‘एक हथिया देवाल’ की अजब कहानी

पिथौरागढ़ जिले में थल के पास दो गांव हैं - अल्मियां और बलतिर. अल्मियां और बलतिर गांव के बीच एक…

4 years ago