सुन्दर चन्द ठाकुर

इस लम्हे से पहले जो हुआ सब भूल जा

यह बात ज्यादातर लोगों को बहुत नागवर लगेगी और बहुत क्रूर भी लेकिन हर पल बिना किसी दुख का, एक…

6 years ago

जीवन में पारदर्शिता ले जाएगी तनावों से पार

 छात्र जीवन में मेरा एक सहपाठी था, जिसके पिता किसान थे और शहरी मानदंडों के हिसाब से गरीब. वह सहपाठी…

6 years ago

सिकंदर की तृष्णा और दार्शनिक फकीर डायोजनीज

सिकंदर यानी अलेक्जेंडर तृतीय के बारे में तो हम सबने सुना ही है कि वह मेसीडोनिया यानी मकदूनिया, जो कि…

6 years ago

बबूल बोओगे, तो आम कहां से खाओगे

जिन लोगों ने भौतिक विज्ञान पढ़ा है, वे न्यूटन के गति के तीसरे नियम से अवश्य परिचित होंगे. तीसरा नियम…

6 years ago

दुखी रहना कहीं आपकी आदत तो नहीं बन गया है

 थोड़ा-सा अटपटा तो लग सकता है, पर सच यही है कि हम अपनी मर्जी से ही दुखी होते हैं. कोई…

6 years ago

मैं पहाड़ों को जन्म से जानता हूं, अपने पिता की तरह

सुन्दर चन्द ठाकुर के कॉलम पहाड़ और मेरा जीवन – अंतिम क़िस्त (पिछली क़िस्त:  मैं बना चौबीस रोटियों का डिनर…

6 years ago

मैं बना चौबीस रोटियों का डिनर करने वाला भिंडी पहलवान

पहाड़ और मेरा जीवन – 66 (पिछली क़िस्त: और यूं एक-एक कर बुराइयां मुझे बाहुपाश में लेती गईं जिम शब्द का…

6 years ago

और यूं एक-एक कर बुराइयां मुझे बाहुपाश में लेती गईं

पहाड़ और मेरा जीवन – 66 (पिछली क़िस्त: वो शेर ओ शायरी, वो कविता और वो बाबा नागार्जुन का शहर…

7 years ago

वो शेर ओ शायरी, वो कविता और वो बाबा नागार्जुन का शहर में आना

पहाड़ और मेरा जीवन – 65 (पिछली क़िस्त: वो मेरा ‘काटो तो खून नहीं’ मुहावरे से जिंदा गुजर जाना तेरी बज्म…

7 years ago

वो मेरा ‘काटो तो खून नहीं’ मुहावरे से जिंदा गुजर जाना

पहाड़ और मेरा जीवन – 64 (पिछली क़िस्त:  सुंदर लाल बहुगुणा से जब मिला मुझे तीन पन्ने का ऑटोग्राफ )…

7 years ago