इतिहास

जिनके बिना भवाली का इतिहास अधूरा हैजिनके बिना भवाली का इतिहास अधूरा है

जिनके बिना भवाली का इतिहास अधूरा है

ब्रिटिश शासन के दौरान ही भवाली के पास नैनीताल-हल्द्वानी रोड पर लगभग एक किमी की दूरी पर वर्ष 1912 में…

4 years ago
26 बरस बाद भी उत्तराखंड के सीने पर मुजफ्फरनगर गोलीकाण्ड के घाव हरे हैं26 बरस बाद भी उत्तराखंड के सीने पर मुजफ्फरनगर गोलीकाण्ड के घाव हरे हैं

26 बरस बाद भी उत्तराखंड के सीने पर मुजफ्फरनगर गोलीकाण्ड के घाव हरे हैं

“जो घाव लगे और जाने गयीं वे प्रतिरोध की राजनीति की कीमत थी”,1996 में इलाहबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रवि…

5 years ago
अतीत के पन्नों में भवाली की राजनैतिक व साहित्यिक भागीदारीअतीत के पन्नों में भवाली की राजनैतिक व साहित्यिक भागीदारी

अतीत के पन्नों में भवाली की राजनैतिक व साहित्यिक भागीदारी

जिक्र भवाली चौराहे का आता है, तो कई यादें दिलो-दिमाग पर तैरने लगती हैं. भवाली का इतिहास, आजादी के पूर्व…

5 years ago
अतीत के पन्नों में भवाली की दो बहिनें ब्लोसम और ब्लांचीअतीत के पन्नों में भवाली की दो बहिनें ब्लोसम और ब्लांची

अतीत के पन्नों में भवाली की दो बहिनें ब्लोसम और ब्लांची

रानीखेत रोड से बाजार की तरफ बढ़ने पर बाईं ओर एमईएस परिसर की तरफ पक्के पैराफिट से लगे कई कच्चे…

5 years ago
आज़ादी के बाद भवाली के इतिहास के पन्ने और मां काली के उपासक श्यामा बाबाआज़ादी के बाद भवाली के इतिहास के पन्ने और मां काली के उपासक श्यामा बाबा

आज़ादी के बाद भवाली के इतिहास के पन्ने और मां काली के उपासक श्यामा बाबा

साल 1964 का जुलाई का महीना रहा होगा, जब भवाली के गोबिन्द बल्लभ पन्त हायर सेकेन्डरी स्कूल में दर्जा 6…

5 years ago
सरकारें रानी कर्णावती के महल को बचाने में नाकाम रही हैंसरकारें रानी कर्णावती के महल को बचाने में नाकाम रही हैं

सरकारें रानी कर्णावती के महल को बचाने में नाकाम रही हैं

गढ़वाल की राजधानी देवलगढ़ से श्रीनगर स्थानान्तरित हो चुकी थी. राजा महिपति शाह की मृत्यु के बाद उनके पु़त्र पृथ्वीपति…

5 years ago
रामगंगा किनारे हुक्का पीते पहाड़ी की 128 साल पुरानी तस्वीररामगंगा किनारे हुक्का पीते पहाड़ी की 128 साल पुरानी तस्वीर

रामगंगा किनारे हुक्का पीते पहाड़ी की 128 साल पुरानी तस्वीर

यह तस्वीर रामगंगा की है. तस्वीर 1892 में अपनी भारत यात्रा के दौरान जर्मन फोटोग्राफर कर्ट बोएक ने ली है.…

5 years ago
कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्र में मुहर्रम जुलूस निकालने की प्राचीन परम्पराकुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्र में मुहर्रम जुलूस निकालने की प्राचीन परम्परा

कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्र में मुहर्रम जुलूस निकालने की प्राचीन परम्परा

ऐतिहासिक संदर्भ कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्र में  मुख्य रूप से अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, रानीखेत और नैनीताल में ताज़िया बनाने की बहुत…

5 years ago
अल्मोड़े के नंदादेवी मेले का इतिहासअल्मोड़े के नंदादेवी मेले का इतिहास

अल्मोड़े के नंदादेवी मेले का इतिहास

प्रतिवर्ष अल्मोड़ा जनपद के मुख्यालय तथा गरूड़ (बैजनाथ) में स्थित कोट नामक स्थान में भाद्र शुक्ल पक्ष अष्टमी को मनाये…

5 years ago
अंग्रेजों के ज़माने में पटवारी अपनी पट्टी का राजा होता थाअंग्रेजों के ज़माने में पटवारी अपनी पट्टी का राजा होता था

अंग्रेजों के ज़माने में पटवारी अपनी पट्टी का राजा होता था

पहाड़ में अब भी बड़े बुजुर्ग कहते हैं सबका बैर झेला जा सकता है पटवारी का बैर नहीं. अब भले…

5 years ago