कॉलम

गरीब के गुरूर को मत जगाना कभी, मैंने चश्मे वाले को यूं दी जबर धमकी

पहाड़ और मेरा जीवन – 60 (पिछली क़िस्त: वह भी क्या कोई उम्र थी पिताजी ये दुनिया छोड़कर जाने की)…

6 years ago

अपने अंतिम दिनों में शैलेश मटियानी

लेखककीय अस्मिता और स्वाभिमान के मूल्य पर कभी समझौता ना करने वाले शैलेश मटियानी पहले अल्मोड़ा में दिखाई देते थे.…

6 years ago

बड़ी मेहनत से बनती है पहाड़ की कुड़ी

पहाड़ में परंपरागत बने मकानों में स्थानीय रूप से उपलब्ध पत्थर, मिट्टी, लकड़ी का प्रयोग होता रहा. हवा और धूप…

6 years ago

यस्य गृहे चहा नास्ति, बिन चहा चहचहायते

नैनीताल में मेरे क्लासफैलो थे कामरेड दीनबंधु पन्त. विचारधारा से वामपंथी इन जनाब की खासियत यह थी कि वे पारिवारिक…

6 years ago

विकास के साये में हमारी लोक थाती

विकास के साथ उपज रहे विनाश के खतरों से आगाह करते हुए यह चेतावनी बार बार दी जाती रही है…

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जल्द ही लुप्त हो जायेंगे परंपरागत पहाड़ी लुहार

उसके चेहरे पर आग की दहक से उभरने वाली चमक बिछी थी... आंखें भट्ठी की आग पर टिकी हुईं. बीच-बीच…

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उचाणा को मेरो मैर : महिलाओं का रचा उत्तराखंडी लोकगीत

उचाणा को मेरो मैर, कनो पड़े गंगाळ! बग्द-बग्द मैर गए देवप्रयाग बेड़, हेरी हेरी दिदा ऐग्यूं रीति घर! हे शोभनू…

6 years ago

एक अजूबा है हल्द्वानी की बड़ी मंडी

बरेली व रामपुर रोड के बीच में स्थित है हल्द्वानी की बड़ी मंडी. जिसका नाम लेते ही आमतौर पर थोक…

6 years ago

आइबिस्बिल पक्षी का रामनगर प्रवास

सर्दियाँ शुरू होते ही कॉर्बेट पार्क, रामनगर व इसके आसपास प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो जाता है. उच्च हिमालयी…

6 years ago

मल्या उड़ कर माल-भाबर की ओर जाते थे और हम गर्म इलाके के अपने दूसरे गांव

पहाड़ की चोटी पर बसे अपने गांव में शीत ऋतु से सामना बचपन में ही हो चुका था. सर्दियां शुरू…

6 years ago