कॉलम

इगास लोकपर्व को राजपत्र में स्थान मिलने के मायने

आज का दिन ऐतिहासिक बन गया है. इक्कीस साल के उत्तराखण्ड में, इसके किसी लोकपर्व को पहली बार राजपत्र में…

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गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की कविता: बाल दिवस विशेष

प्रख्यात जनधर्मी कलाकार-कवि के रूप में गिर्दा हमारे दिलों में अमर हैं. बाल दिवस पर सुनिये युवा कलाकार करन जोशी द्वारा…

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तिवारीजी का झुनझुना बजाने में मस्त हैं आंदोलनकारी

आज एक बुजुर्ग से मुलाकात हुई तो उनके बाजार में आने का कारण यूं ही बस पूछ बैठा. इस पर…

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उत्तराखण्ड की ग्रामीण महिलाओं में सामूहिक मेलजोल और उत्सवधर्मिता

सामान्यतः पहाड़ के गांव की महिलाओं के दैनिक जीवन का स्वरूप अत्यधिक व्यस्त और संघर्षमय  रहता है.  छह ऋतुओं, 12 महीने उनके…

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माँ का जादुई बक्सा

हलवाई पांचवीं बार अपना हिसाब करने आया था. (Mother's Magic Box) —'तुम्हारा कितना हुआ भाई' पापा पांचवीं बार उससे पूछ…

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पन्त-मटियानी के बेमेल युग्म का मिथक

इस किस्से की प्रामाणिकता का मैं दावा नहीं करता. बाकी लोगों की तरह मैंने भी इसे दूसरों के मुंह से…

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वरिष्ठ व्यंग्यकार की आवश्यकता है

“अरी ऐ री आली!” “हाँ, सखी बोल!” “आली…” “सखी तू किंचित सी चिंतित प्रतीत होती है.” “किंचित नहीं आली, अत्यंत.…

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ठेठ पहाड़ी खेलों की याद

खेल के मैदान में आजकल भारत के कई खिलाड़ी कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं. पढाई के साथ खेलकूद को भी…

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जंगल का राजा शेर क्यों, कभी सोचा?

यह तथ्य निर्विवाद है कि जंगल का राजा शेर होता है. हमने इसे एक तथ्य, एक सत्य इसलिए माना, क्योंकि…

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कुमाऊं के अल्मोड़ा क्षेत्र में जब समुद्री यात्रा करने वाले को जाति से बाहर किया जाता था

भारत में लम्बे समय तक समुद्री यात्रा करना पाप समझा जाता था जिसका एक कारण हिन्दू धर्म में समुद्र को…

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