कला साहित्य

कहानी: सूरज के डूबने से पहले

-धर्मपाल सिंह रावत "जरा सांस ले ले. बस थोडा और रह गया है, आ गई तैल्या की धार, वहाँ  टावर…

2 years ago

कहानी: माँ पेड़ से ज़्यादा मज़बूत होती है

कहानियों का नदी की तरह कोई मुहाना नहीं होता ना ही सितारों की तरह उनका कोई आसमान. एक सजग दृष्टि…

2 years ago

कहानी: कलकत्ते में एक रात

-आचार्य चतुरसेन शास्त्री कलकत्ता जाने का मेरा पहला ही मौका था. मैं संध्या-समय वहां पहुंचा, और हरीसन रोड पर एक…

2 years ago

नैनीताल ने मुझे मेरी डायरी के सबसे यादगार किस्से दिए

आज जब एक साल बाद नैनीताल आई, तो लगा जो भी यहाँ से लेकर गई हूँ, सारी अच्छी-बुरी यादें, खट्टे-मीठे…

2 years ago

कहानी : साहब बहुत साहसी थे

आज शेविंग करते  हुए ना जाने ध्यान  बंट गया या  फिर वही जल्दबाजी  हुई कि गाल में एक बड़ा सा…

2 years ago

कहानी : मोक्ष

दूर कहीं जंगल में घसियारियों के गीत समवेत स्वर में गुंजायमान हो रहे हैं. उधर डाल पर दरांतियों से जैसे…

2 years ago

एक थी सुरेखा

सालों बाद आज  मैसेंजर पर मेरी नरेन से बात हुई. नरेन सुरेखा का छोटा भाई है. अभी कुछ दिनों पहले…

2 years ago

चाय की टपरी

दरअसल ये बात है उस शाम की; जब बेचैन मन को शांत करने की कोशिश में मैं वादियों में टहलने…

2 years ago

इस्मत चुग़ताई की कहानी : तो मर जाओ

“मैं उसके बिना जिन्दा नहीं रह सकती!” उन्होंने फैसला किया. (Toh Mar Jao) “तो मर जाओ!” जी चाहा कह दूँ.…

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कहानी: रेल की रात

-इलाचंद्र जोशी गाड़ी आने के समय से बहुत पहले ही महेंद्र स्टेशन पर जा पहुंचा था. गाड़ी के पहुंचने का…

2 years ago