कला साहित्य

माफ़ करना हे पिता

सभी के होते हैं, मेरे भी एक (ही) पिता थे. शिक्षक दिवस सन् २००१ तक मौजूद रहे. उन्होंने ७१-७२ वर्ष…

5 years ago

ईजा

आज उसके मन में जाने कैसी उथल पुथल मची है. सारी रात करवटें बदलते हुए ही गुजरी और न जाने…

5 years ago

शैलेश मटियानी की कहानी : उसने तो नहीं कहा था

राइफल की बुलेट आड़ के लिए रखी हुई शिला पर से फिसलती हुई जसवंतसिंह के बाएँ कंधे में धँसी थी,…

5 years ago

आम बहुत ख़ास है.

आम फलों का राजा है. ना ! ये राजा नहीं चक्रवर्ती सम्राट है फलों का. दुनिया में ज़्यादातर देशों में…

5 years ago

लोककथा : पैसा सबकुछ कर सकता है

एक बार एक बहुत रईस शहजादे ने राजा के महल के ठीक सामने उससे भी शानदार एक महल बनवाने का…

5 years ago

कहानी : रुका हुआ रास्ता

घास-पात से निबटकर गोमती भैंस हथियाने गोठ गई हुई थी. असाढ़-ब्याही भैंस थी. कार्तिक तक तो ठीक चलती रही, मगर…

5 years ago

प्रेत-मुक्ति : शैलेश मटियानी की कहानी

केवल पांडे आधी नदी पार कर चुके थे. घाट के ऊपर के पाट में अब, उतरते चातुर्मासा में सिर्फ घुटनों…

5 years ago

कहानी : बगावत की वजह

एक कस्बा था जहाँ सारी चीजों की मनाही थी. (Story Bagawat Ki Wajah) अब चूँकि सिर्फ गुल्ली-डंडा का खेल ही…

5 years ago

आवारा भीड़ के खतरे : हरिशंकर परसाई

एक अंतरंग गोष्ठी सी हो रही थी युवा असंतोष पर. इलाहाबाद के लक्ष्मीकांत वर्मा ने बताया - पिछली दीपावली पर…

5 years ago

एक मध्यमवर्गीय कुत्ता : हरिशंकर परसाई

मेरे मित्र की कार बँगले में घुसी तो उतरते हुए मैंने पूछा, 'इनके यहाँ कुत्ता तो नहीं है?' मित्र ने…

5 years ago