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भुप्पी पांडे हत्याकांड में नैनीताल जिलाधिकारी कार्यालय कितना ज़िम्मेदार

बीते दिन हल्द्वानी शहर में दिन दहाड़े हुये हत्याकांड के बाद सोशियल मिडिया पर बहस का सिलसिला थम नहीं रहा है. सोशियल मिडिया पर लोग अलग-अलग तरह की टिप्पणी कर रहे हैं. Bhuppi Pandey Murder Case Uttarakhand

इसमें अधिकांश का मानना है कि यह हत्या पुलिस प्रशासन की लापरवाही के चलते हुई है. कुछ लोगों का मानना है कि इस हत्याकांड में शामिल गुप्ता बंधुओं को पुलिस का संरक्षण मिला था.

दोनों भाइयों सौरभ गुप्ता और गौरव गुप्ता पर पहले से 15 मुक़दमे दर्ज थे इसके बाद भी दोनों भाई शहर भर में लाइसेंसी बंदूक लटकाये घुमते थे. दैनिक जागरण में छपी एक ख़बर के अनुसार मुकदमों और शिकायतों की वजह से पुलिस ने गौरव गुप्ता का शस्त्र निरस्त करने की रिपोर्ट तैयार कर पुलिस ने एक अगस्त को जिलाधिकारी कार्यालय भेज दी थी लेकिन वहां मामले को लटका कर रखा गया.

आज जब पुलिस प्रशासन ने कोतवाल को निलम्बित कर दिया है तब ऊंगलियां नैनीताल जिलाधिकारी कार्यालय पर भी उठने लगी हैं. शस्त्र निरस्त करने का अधिकार जिलाधिकारी के पास होता है. यदि इतने महीने पहले ही जिलाधिकारी कार्यालय को पुलिस द्वारा शस्त्र निरस्त करने संबंधी रिपोर्ट सौंप दी गयी थी फिर किसके कहने पर मामले को लटकाकर रखा गया.

गुप्ता बंधुओं की फेसबुक प्रोफाईल में जिस तरह शहर के कई छोटे बड़े अफसरों के साथ मंच साझा करने की तस्वीरें नज़र आ रही है उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दोनों भाइयों का शहर में क्या रसूख था.

भुप्पी पांडे द्वारा अपनी जान को ख़तरा पिछले कई महीनों से बताया जा रहा था उन्होंने इस संबंध में एक पत्र तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को लिखा था. लेकिन किसी ने भी भुप्पी पांडे की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया नतीजतन भुप्पी पांडे को अपनी जान गवानी पड़ी. Bhuppi Pandey Murder Case Uttarakhand

-काफल ट्री डेस्क

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Girish Lohani

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