सियार और बाघिन: आदर्श पति की कहानी

बहुत समय पहले, पहाड़ों और जंगलों से घिरे एक इलाके में एक शक्तिशाली बाघ और उसकी बाघिन अपने तीन बच्चों के साथ रहते थे. बाघ पूरे जंगल में अपने साहस और बल के लिए प्रसिद्ध था. सभी जानवर उसका सम्मान करते थे. उसी जंगल में एक सियार भी रहता था; जो बहुत चतुर, चालाक, लेकिन बेहद आलसी था. सियार को यह बात खलती थी कि सब बाघ की बहादुरी की प्रशंसा करते हैं, जबकि उसकी चालाकी को कोई नहीं समझता. वह मन ही मन सोचता, “अगर लोग मुझे भी बहादुर मानने लगें, तो मेरी इज़्ज़त भी बाघ जैसी हो जाएगी.”

एक दिन सियार को मौका मिल गया. बाघ शिकार के लिए जंगल से बाहर गया हुआ था. सियार बाघ की गुफा के पास पहुंचा और बाघिन को ऊँची आवाज़ में चिढ़ाने लगा—

“तुम्हारा बाघ बहुत बड़ा वीर कहलाता है, लेकिन अगर आज सामने होता तो मैं उसे सबक सिखा देता!”

बाघिन को यह बात अजीब लगी, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा. अगले दिन भी सियार ने यही हरकत दोहराई. तीसरे दिन बाघ ने यह सब सुन लिया. वह गुस्से में सियार के पीछे दौड़ा. जान बचाने के लिए सियार एक खोखले लकड़ी के तने में घुस गया. बाघ भी पीछे गया, लेकिन तना संकरा था, बाघ वहीं फँस गया. किसी तरह सियार बच निकला.

इसके बाद सियार ने जंगल में अफ़वाह फैला दी कि बाघ डरकर नदी में कूद गया और मारा गया. दिन बीतते गए. बाघ वापस नहीं आया. बाघिन को बच्चों की परवरिश अकेले करना मुश्किल लगने लगा.

सियार ने सहानुभूति दिखाते हुए कहा,

“अगर चाहो, तो मैं तुम्हारा सहारा बन सकता हूँ. मैं बहादुर भी हूँ और समझदार भी.”

मजबूरी में बाघिन ने उससे विवाह कर लिया.

शादी के बाद सच्चाई सामने आने लगी. सियार न शिकार करता था, न मेहनत. दिन भर धूप में सोता और झूठी शान बघारता. जब भी बाघिन कुछ कहती, वह बड़ी चतुराई से बात घुमा देता.

एक दिन दोनों शिकार पर निकले. बाघिन ने योजना बनाई, वह नीचे से रास्ता रोकेगी, सियार ऊपर से जानवरों को भगाएगा. लेकिन जैसे ही एक बड़ा बैल सियार की ओर बढ़ा, वह डर के मारे भाग गया. बैल के सींगों से टकराकर वह दूर जा गिरा.

शाम को खाली हाथ लौटकर सियार ने कहा,

“आज तो जंगल में कोई ढंग का जानवर ही नहीं मिला.”

बाघिन को शक हुआ, लेकिन वह चुप रही.

एक दिन रास्ते में गहरी खाई आई. बाघिन आसानी से पार कर गई. सियार डर गया. डर छुपाने के लिए बोला,

“मैं बस देख रहां हूँ कि यह जगह खेती के काम की है या नहीं.”

हर जगह वह अपने डर को चालाकी से ढक लेता.

आख़िरकार सियार ने सबसे बड़ी चाल चली. उसने बैल को ऊँची चट्टान से धक्का देकर मार दिया और मांस छुपा दिया. फिर बाघिन से बोला कि बैल गुफा में फँस गया है. जैसे ही बाघिन ने पूँछ पकड़कर खींचा, सियार ने छोड़ दिया और बाघिन खाई में गिर गई. सौभाग्य से वह बच गई.

सियार ने फिर झूठ बोला—

“तुम बहुत ज़ोर से खींच रही थीं, इसलिए ऐसा हुआ.”

बाघिन अब सब समझ चुकी थी. लेकिन वह शांत रही. उसने सियार को छोड़ दिया, और बच्चों को लेकर जंगल के सुरक्षित हिस्से में चली गई.

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