‘सब हो जायेगा’ वाले भाई साहब

8 years ago

'चिंता मत करो, सब हो जायेगा !' की तसल्ली देने वाले भाई लोगों की तादाद इन दिनों एकाएक काफी बढ़…

नैनीताल पहुंची ‘जन संवाद यात्रा’

8 years ago

नवम्बर 2000 में पृथक उत्तराखंड राज्य के अस्तित्व में आने के बाद 18 साल गुजर चुके हैं, ऐसा कहा जा…

ट्रेल पास अभियान भाग – 5

8 years ago

पिछली कड़ी पिण्डारी कांठा में चार दिन पांच अक्टूबर के प्रातः ही चाय के पश्चात् चन्दोल, तेवारी, शाहजी और कीर्तिचन्द…

कुमाऊंनी लोकगीतों में सामाजिक चित्रण भाग – 2

8 years ago

पिछली कड़ी विवाहोपरान्त पुत्री की विदाई सर्वत्र करूण होती है. वह मां की दुलारी है, जिसने उसे पालपोस कर बड़ा…

बहुत कम समय भी रहता है देर तक

8 years ago

मन का गद्य -शिवप्रसाद जोशी एक हल्की सी ख़ुशी की आहट थी. लेकिन जल्द ही ये आवाज़ गुम हो गई.…

जैसे कोई कीमती चीज सदा के लिए मिट्टी में मिल गई हो

8 years ago

इक नग़मा है पहलू में बजता हुआ - शंभू राणा करीब पांचेक साल बीत गए सतीश को गुजरे हुए. वह…

ओह कसारदेवी : एक फोटो निबंध

8 years ago

सभी फोटो जयमित्र सिंह बिष्ट के हैं.

आदमी उस तहखाने के नाम से डरता था

8 years ago

भय के कोने भय से निजी कुछ नहीं. कुछ पल हर आदमी के जीवन में लौट लौट कर आते हैं…

आँखों में काला मोतियाबिन्द ठहर गया लेकिन शहर से हवाई जहाज नहीं उड़ा

8 years ago

पिथौरागढ़ नैनीसैनी गाँव की एक आमा है जो एक ज़माने में गांव के लड़कों की काखि ( चाची ) हुआ…

प्रकट सुंदरता के भीतर कितने जलजले – आलोक धन्वा की कविता – 2

8 years ago

(पिछली कड़ी से आगे) अपने भीतर घिरते जाने की कविताः आलोक धन्वा के बारे में -शिवप्रसाद जोशी आलोक धन्वा क्या…