दूसरे की थाली पर नजर रखने वाले

8 years ago

कुछ लोग होते हैं, जो अपनी क्षमता तथा सामर्थ्य के अनुसार अपने जीवन की बेहतरी की कोशिश करते हैं. इसमें…

चेकोस्लोवाकिया के भूत-भिसौणों के किस्से

8 years ago

भूत-प्रेत और उनके अस्तित्व और उनके बारे में प्रचलित बेहद रचनात्मक किस्से-कहानियां बचपन से ही मुझे बहुत आकर्षित करते रहे…

कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 73

8 years ago

डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है - “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि…

एक चमत्कारी पौधा सिसूण, कनाली उर्फ़ बिच्छू घास

8 years ago

मेरे बचपन की सुनहरी यादों में से कई गर्मियों के सालाना प्रवास से जुड़ी हैं. उन दिनों सभी प्रवासियों के…

अपने समय के सुपरस्टार्स को जेब में लेकर घूमते थे कादर खान

8 years ago

एक ज़माना था जब कादर खान को एक फिल्म लिखने के अमिताभ बच्चन से ज़्यादा पैसे मिलते थे. सत्तर और…

देबी के बाज्यू आये पंतनगर

8 years ago

कहो देबी, कथा कहो – 25 पिछली कड़ी:कहो देबी, कथा कहो – 24, पंतनगर में दुष्यंत कुमार और वीरेन डंगवाल…

नए साल का कैलेण्डर, पतझड़ और मौसमे-बहार वगैरह

8 years ago

सभी को पता है फिर भी बताना ठीक रहता है कि नया साल आ गया. अपना मकसद नये साल की…

डाक टिकट भी जारी हो चुका है हिमालय के इस वफादार-बहादुर कुत्ते पर

8 years ago

हिमालय के पहाड़ी इलाकों ख़ास तौर पर उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश और नेपाल में पाई जाने वाली कुत्तों की सबसे विख्यात…

कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 72

8 years ago

डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है - “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि…

और इस तरह रातोंरात मैं बुद्धू बच्चे से बना एक होशियार बालक

8 years ago

पहाड़ और मेरा बचपन – 14 (पिछली क़िस्त : और इस तरह जौ की ताल ने बचाई इज्जत, मैंने मां…