काले कौआ : ले कौवा पुलेणी, मी कें दे भल-भल धुलेणी

7 years ago

पूस की कुड़कुड़ा देने वाली ठंड, कितना ही ओढ़ बिछा लो, पंखी, लोई लिपटा लो कुड़कुड़ाट बनी  रहती. नाक से भी…

ठांगर घेंटने का सगुर होना चाहिए

7 years ago

कौन बनेगा हमारा ठांगर? जिसमें हम लगूले, हरे-भरे से, ऊपर चढ़कर अपनी सफलता पर इतरायेंगे. फल देंगे और फिर एक…

उत्तराखण्ड के विकास का रास्ता अपनी ही बुनियाद खोदने से शुरू होता है

7 years ago

उत्तराखंड में विदेश जा कर विकास का मॉडल देखने की खूब चर्चा है. चर्चा तो राज्य की प्रति व्यक्ति आय…

दारमा घाटी के परम्परागत घर और बर्तन

7 years ago

दारमा इलाके में फाफ़र और उगल को भकार के साथ कुंग में भी जमा किया जाता. दारमा के दुमंजिले मकानों  में…

साठ के दशक में हल्द्वानी का समाज

7 years ago

सन् 1970 तक शादी-ब्याह की रस्में भी यहां ठेठ ग्रामीण परिवेश में ही हुआ करती थीं. न्योतिये प्रातः पहुँच जाते…

अल्मोड़ा के सिमतोला, कसार देवी और बिनसर में हुए ताज़ा हिमपात की तस्वीरें

7 years ago

2020 के पहले खूबसूरत हिमपात के बाद अल्मोड़ा के सिमतोला, कसार देवी और बिनसर का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता…

भय बिनु होय न प्रीति का पहाड़ी कनेक्शन – चेटक लगना

7 years ago

बचपन से कई ऐसे संवाद धार्मिक प्रसंगों में सुनते आये हैं जिनका आशय तो हम नहीं समझ पाते लेकिन अतार्किक…

नखलिस्तान – गीता गैरोला की कहानी स्मिता कर्नाटक की आवाज में

7 years ago

हमारी नियमित लेखिका गीता गैरोला ने आपको अनेक मनभावन कहानियां सुनाई हैं. हाल ही में हमने उनकी मशहूर किताब ‘मल्यो…

जब हल्द्वानी में लोग घरों के किवाड़ भी खुले रखते थे

7 years ago

सन् 1970 से पहले यहाँ बहुत से घरों में बिजली भी नहीं थी. 1956 में नैनीताल रोड पर डीजल पावर…

धारचूला के रं लोगों से सीखना चाहिए अपनी भाषा बोली का सम्मान करना

7 years ago

कोई भी संस्कृति अपनी भाषा बोली को संरक्षित किये बगैर लम्बे समय तक जीवित नहीं रह सकती. यह बात छोटी…