ताऊ जी का व्यक्तित्व इलाके में किंवदंती था

6 years ago

कुछ लोग बड़े करिश्माई व्यक्तित्व के होते हैं. जटिल से जटिल परिस्थिति में भी सटीक समाधान देते हैं. समाज से…

काले कव्वा : एक दिन की बादशाहत

6 years ago

मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले ‘घुघते’ आदि पकवान बनाकर दूसरी सुबह बच्चों के द्वारा कव्वों को खिलाये जाते…

वो मेरा ‘काटो तो खून नहीं’ मुहावरे से जिंदा गुजर जाना

6 years ago

पहाड़ और मेरा जीवन – 64 (पिछली क़िस्त:  सुंदर लाल बहुगुणा से जब मिला मुझे तीन पन्ने का ऑटोग्राफ )…

पहाड़ से आये लोग हल्द्वानी में सम्पन्न घरों के बजाय आम घरों में मेहमान बनना पसंद करते थे

6 years ago

सन 80 से पहले पहाड़ी क्षेत्रों को मैदानी क्षेत्रों से जोड़ने वाली यातातया व्यवस्था वर्तमान के मुकाबले बहुत ही कम…

काले कौआ : ले कौवा पुलेणी, मी कें दे भल-भल धुलेणी

6 years ago

पूस की कुड़कुड़ा देने वाली ठंड, कितना ही ओढ़ बिछा लो, पंखी, लोई लिपटा लो कुड़कुड़ाट बनी  रहती. नाक से भी…

ठांगर घेंटने का सगुर होना चाहिए

6 years ago

कौन बनेगा हमारा ठांगर? जिसमें हम लगूले, हरे-भरे से, ऊपर चढ़कर अपनी सफलता पर इतरायेंगे. फल देंगे और फिर एक…

उत्तराखण्ड के विकास का रास्ता अपनी ही बुनियाद खोदने से शुरू होता है

6 years ago

उत्तराखंड में विदेश जा कर विकास का मॉडल देखने की खूब चर्चा है. चर्चा तो राज्य की प्रति व्यक्ति आय…

दारमा घाटी के परम्परागत घर और बर्तन

6 years ago

दारमा इलाके में फाफ़र और उगल को भकार के साथ कुंग में भी जमा किया जाता. दारमा के दुमंजिले मकानों  में…

साठ के दशक में हल्द्वानी का समाज

6 years ago

सन् 1970 तक शादी-ब्याह की रस्में भी यहां ठेठ ग्रामीण परिवेश में ही हुआ करती थीं. न्योतिये प्रातः पहुँच जाते…

अल्मोड़ा के सिमतोला, कसार देवी और बिनसर में हुए ताज़ा हिमपात की तस्वीरें

6 years ago

2020 के पहले खूबसूरत हिमपात के बाद अल्मोड़ा के सिमतोला, कसार देवी और बिनसर का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता…