समाज में पर्यावरण के प्रति महिलाओं का दृष्टिकोण

5 years ago

भारतीय समाज के निर्माण में महिलाओं की महत्ती भूमिका रही है. यहां की महिलाओं ने घर, परिवार, समाज एवं राजकीय…

गोविन्द वल्लभ पन्त की कहानी ‘फटा पत्र’

5 years ago

प्रजापति और मास्टरों के घंटों में इतनी शरारत नहीं करता था, जितनी पंडित श्रानंदरन साहित्य-शास्त्रीजी के घंटे में. वे जब…

जिंदगी बनेगी बेहतर, चौकन्नी नजर तो पैदा कर

5 years ago

जीवन रस्सी पर चलने वाले नट जैसा संतुलन मांगता है. हर नए क्षण में संतुलन. क्योंकि इस क्षण अगर इस…

उदय शंकर संगीत एवं नृत्य अकादमी के मंच पर ‘पहाड़ के रंग’ की अद्भुत तस्वीरें

5 years ago

उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा, पहाड़ की संस्कृति को संरक्षित रखने में हमेशा अग्रणी रही है. इस क्रम में पिछले…

पहाड़ की होली और होल्यारों की रंग भरी यादें

5 years ago

पहाड़ की होली और होल्यारों की यादो का रंगीन पिटारा जहां भी खुले शमा रंगमस्त हो जाता है. कभी वक्त…

जब उत्तराखंड के जंगलों में भटके दयानन्द सरस्वती

5 years ago

स्वामी दयानन्द जी 11 अप्रैल सन् 1855 को 30 वर्ष की उम्र में कुम्भ मेले की धूम सुनकर उत्तराखण्ड के…

पहाड़ के गांवों में नाचने वाली ‘रफल्ला’ के जीवन की कहानी

5 years ago

फागुन के आखिरी दिनों में रफल्ला, गाँव के नजदीक के गधेरे में अपना घाघरा धो रही है. बसंत इन दिनों…

कठिन पद यात्रायें प्रकृति के करीब ले जाती हैं

5 years ago

ऊपर ज्योरागली में धूप निखर आई थी. कुछेक साथी वहां पहुंच भी गए थे तो ठंड में जमी रूपकुंड झील…

देहरादून में रहने वाले बारह साल के बच्चे की दूसरी किताब

5 years ago

अमरीका के सबसे ज़्यादा बिकने वाले समकालीन लेखकों में से एक क्रिस्टोफ़र पॉलीनि अब सैंतीस साल के हैं. जब उनकी…

मेरी हरिद्वार यात्रा: भारतेंदु हरीशचंद्र का यात्रा-वृत्तांत

5 years ago

सन 1871 की यात्रा (हरिद्वार) के बाद भारतेन्दु ने हरिद्वार के एक पण्डे को पत्र में लिखा था-(Haridwar Travelogue by…