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केदारनाथ यात्रा में पहली बार भक्तों की संख्या 10 लाख के पार पहुंची

कहते हैं रिकार्ड बनते ही टूटने के लिए हैं. ऐसे ही रिकार्ड बनेंगे ओर टूटते रहेंगे. (10 Lakh Devotees Reached Kedarnath)

इस वर्ष संपन्न हुई बाबा केदारनाथ यात्रा के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया. पहली बार दर्शनार्थियों की संख्या दस लाख के पार पहुंची, जो एक नया रिकार्ड है.

केदारनाथ धाम मे इस वर्ष रिकार्ड 10 लाख 21 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए

यात्राकाल मे प्रतिदिन धाम में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही.

इस वर्ष कपाट खुलने के दिन से ही यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला है. पहले दिन जहां 6680 शिव भक्तों ने दर्शन कर यात्रा को नया आयाम दिया.

वहीं, शुरूआती दो माह में आंकड़ा 7 लाख पहुंच गया. और पिछले वर्ष की यात्रा मे पहुंचे कुल श्रद्धालुओं का रिकार्ड 21 जून को ही टूट गया. लेकिन जुलाई से अगस्त तक बरसात के चलते यात्रा की रफ्तार थम गई थी. इस दौरान बमुश्किल से 68 हजार यात्री ही धाम पहुंच पाए.

बाद मे यात्रा ने फिर से गति पकड़ ली और प्रतिदिन दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ने लगी.

9 मई से 29 अक्टूबर 2019 तक संचालित बाबा केदारनाथ की यात्रा में इस वर्ष उमड़े आस्था के

सैलाब ने कारोबार को पंख लगाने मे अहम भूमिका निभाई

इस बार केदारनाथ धाम से बदरी-केदार मंदिर समिति को 19 करोड़ से अधिक की आय अर्जित हुई है. अकेले केदारनाथ मंदिर से पहली बार मंदिर समिति को इतनी आय अर्जित हुई है. इससे पहले मंदिर समिति को केदारनाथ में दान और चढ़ावे से 13 करोड़ की आय प्राप्त हुई थी. (10 Lakh Devotees Reached Kedarnath)

जहां घोड़े-खच्चरों के संचालन से करीब 55 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ. वहीं 9 हैली कंपनियों द्वारा 76 करोड़ का व्यवसाय किया गया.

वहीं केदारनाथ यात्रा के रूट पर पड़ने वाले ढाबा व छोटे दुकानदारों द्वारा 4 से 25 लाख तक आय अर्जित की गई.

पहाड़ी खाने के शौकिनों के लिए सोनप्रयाग स्थित “पहाड़ी किचन” ने यात्राकाल में 1 करोड़ की आय अर्जित की.

ये देवभूमि के लिए खुशी की बात है कि देश-विदेश से लोग बाबा केदारनाथ के दर्शनों को यहां पधार रहे हैं. बाबा केदार के कपाट शीतकाल के लिए बंद

खुशी हो भी क्यो न हो आखिर यहां के बाशिंदो की रोजी रोटी बाबा केदारनाथ यात्रा पर ही आश्रित है.ओर बाबा की कृपा आगे भी ऐसी ही बनी रहेगी. उम्मीद की जा रही है अगले वर्ष यात्रा को नया आयाम मिलेगा.

यह लेख गुप्तकाशी, रुद्रप्रयाग से कैलास नेगी द्वारा भेजा गया है.

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Sudhir Kumar

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