भारत में 80 प्रतिशत प्लास्टिक को बिना रीसाइकल किये ही फेंक दिया जाता है. आज हमारे घरों में रसोई घर से लेकर पाखाने तक प्लास्टिक घुसा हुआ है. ऐसे में एक शहर जहां पर्यटन अधिक होता हो वहां प्लास्टिक और बड़ी समस्या बन जाती है.
मसूरी के पास बंगलो की कांडी नाम के गांव के लोगों ने 15000 प्लास्टिक की बोतलों से बनाई है उम्मीद की दीवार. हिन्दुस्तान टाइम्स की एक ख़बर के अनुसार यह दीवार 12 फीट ऊंची और 1500 फीट लम्बी है.
दीवार को म्यूजियम ऑफ़ गोवा के फाउंडर सुबोध केरकर ने किया है. मसूरी के स्कूल और कॉलेज के 50 बच्चों और कैम्पटी फॉल के नजदीक स्थित बंगलो की कांडी गांव की महिलाओं ने इस दीवार को बनाने में सहायता की. दीवार के निर्माण के लिये प्रयोग में लाई गयी सभी प्लास्टिक को बोतलें आस-पास के क्षेत्रों से ही उठाई गई हैं.
इस दीवार के माध्यम से कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन का एक मजबूत सन्देश दिया गया है. इस संबंध में गांव की सरपंच रीना रंगाद का कहना है कि इस दीवार के माध्यम से यहां न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि उन तक प्लास्टिक के रियूज का एक सन्देश भी जायेगा. दीवार का उद्घाटन मसूरी के पास बंगला की कंडी गांव की रहने वाली ग्राम प्रधान रीना रंगल ने किया
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस उम्मीद की दीवार से हमारा गांव और सुंदर दिख रहा है जब लोग इस दीवार को देखने आयेंगे तो उन्हें प्लास्टिक के रचनात्मक पुनः उपयोग के बारे में भी सीखने को मिलेगा.
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