Featured

स्कूलों की प्रार्थना सभा में बच्चे गायेंगे जनकवि गिर्दा का गीत

नैनीताल के सभी स्कूलों में अब सुबह की प्रार्थना सभा में जनकवि गिरीश चन्द्र तिवारी ‘गिर्दा’ का गीत गाया जायेगा. नैनीताल जिले में प्राथमिक से इंटरमीडिएट तक के सभी सरकारी स्कूलों में होने वाली सुबह की प्रार्थना सभा में गिर्दा का जो गीत गाया जायेगा उसके बोल हैं- उत्तराखंड मेरी मातृभूमि, मातृभूमि यो मेरी पितृभूमि, ओ भूमि तेरी जय जय कारा… म्यर हिमाला
(Uttarakhand Meri Janmbhoomi in Schools)

‘उत्तराखंड मेरी मातृभूमि’ गीत को उत्तराखंड का अघोषित राज्य गीत तक माना जाता है. इस गीत में पूरे उत्तराखंड की भौगोलिक झलक मिलती है. भावनात्मक रूप से तो यह गीत महत्वपूर्ण है ही साथ ही यह बच्चों को उत्तराखंड राज्य की भौगोलिक जानकारी देने के लिये भी एक शानदार गीत है. यह जनकवि गिर्दा की विशेषता है कि वह इतनी आसानी से एक ही गीत में हिमालय के ऊंचे शिखरों के साथ तराई भाबर को पिरो देते हैं.      

वर्तमान में उत्तराखंड के काफ़ी स्कूलों में ‘उत्तराखंड मेरी मातृभूमि’ प्रार्थना सभा में गाया जाता है. इनमें अधिकाँश स्कूल पहाड़ी इलाकों के हैं. इन स्कूलों में यह पहल वहां के शिक्षकों द्वारा शुरू की गयी है.    
(Uttarakhand Meri Janmbhoomi in Schools)

नैनीताल के जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल ने जिला शिक्षा विभाग को निर्देशित करते हुए कहा कि इससे संबंधित जरूरी कवायद जल्द से जल्द शुरू की जाये. भीमताल में विकास भवन सभागार में हुई बैठक में जिलाधिकारी ने सीईओ को पांचवीं तक की कक्षाओं में कुमाऊनी बोली की एक-एक पुस्तक को आवश्यक रूप से पढ़ाने के भी निर्देश दिये.  

‘उत्तराखंड मेरी मातृभूमि’ के पूरे बोल इस तरह हैं-

उत्तराखंड मेरी मातृभूमि, मातृभूमि यो मेरी पितृभूमि ,
ओ भूमि तेरी जय जय कारा… म्यर हिमाला

ख्वार में कूट तेरो ह्युं झलको -२ ,
छलकी गाड़ गंगा की धारा… म्यर हिमाला

तली-२ तराई कुनि
मली-मली भाभरा …म्यर हिमाला

बद्री केदारा का द्वार छाना
म्यर कानखला हरिदवरा… म्यर हिमाला

काली धौली का बलि छाना जानी
बाटा नान ठुला कैलाशा… म्यर हिमाला

पार्वती को मेरो मैत ये छा,
ओ यों छा शिवज्यू को सौराशा …म्यर हिमाला

धन में मेरो यों जनम ….
ओ भयो तेरी कोखि महान… म्यर हिमाला

मरी जुलो तो तारी जुलो …
ओ ईजू एले त्यार बाना… म्यर हिमाला.

गिरीश चन्द्र तिवारी ‘गिर्दा’

काफल ट्री फाउंडेशन

Support Kafal Tree

.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

View Comments

  • अपनी संस्कृति को सहेजना ऐसे ही मधुर निर्णयों से संभव है । गिर्दा जैसे अमर व्यक्तित्व पर उत्तराखंड को गर्व रहेगा ।

Recent Posts

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

4 weeks ago

जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि

भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…

4 weeks ago

आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’

उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…

4 weeks ago

द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा

‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म…

4 weeks ago

हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता

कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था…

1 month ago

पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया

बीते दिन सुबह लगभग चार बजे एक ऐसी खबर आई जिसने कौसानी और लक्ष्मी आश्रम…

1 month ago