Featured

19वें स्थापना दिवस पर उत्तराखंड सरकार सप्ताह भर करेगी आयोजन

9 नवंबर के दिन पिछले कई सालों से उत्तराखंड सरकार राज्य स्थापना दिवस मनाती है. इस वर्ष राज्य सरकार एक दिन नहीं बल्कि पूरा सप्ताह राज्य स्थापना सप्ताह मनाने जा रही है. (Uttarakhand Foundation Day)

3 नवंबर से 9 नवम्बर तक उत्तराखंड सरकार राज्य के 7 स्थानों में आयोजित किया जायेगा. सभी कार्यक्रम टिहरी, देहरादून, श्रीनगर, अल्मोड़ा, मसूरी और देहरादून में होंगे. (Uttarakhand Foundation Day)

3 नवंबर को टिहरी में ‘आवा अपुण घोर’ (आइये अपने घर) कार्यक्रम का आयोजन होगा. 4 नवंबर को देहरादून में ‘मेरा सैनिक मेरा अभिमान’ कार्यक्रम होगा.

6 नवंबर को श्रीनगर गढ़वाल में महिला सम्मेलन आयोजित होगा. 7 नवंबर को अल्मोड़ा में युवाओं पर केंद्रित ‘मेरा युवा मेरी शान’ सम्मेलन का आयोजन होगा.

8 नवंबर को पर्यटन नगरी मसूरी में फिल्मी हस्तियां जुटेंगी जिसका उद्देश्य प्रदेश में फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करना है. मसूरी में फिल्म कॉन्क्लेव का आयोजन होगा.

9 नवंबर को उत्तराखंड स्थापना दिवस का मुख्य समारोह देहरादून में आयोजित होगा. कार्यक्रम के संबंध में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत एक वीडियो जारी किया है जिसमें उन्होंने लिखा है कि

इस बार का “राज्य स्थापना दिवस” आप और हम मिलकर बनाएँगे बेहद खास, हमारा प्रयास है कि उत्तराखंड के भविष्य से जुड़ी हर रणनीति पर मंथन किया जाए. “राज्य स्थापना सप्ताह” मनाने का भी यही उद्देश्य है. देश-विदेश में बसे हमारे उत्तराखंड के प्रवासी भाई-बहनों को उनके गांव से जुड़ने की मुहिम के तहत 03 नवंबर 2019 से 09 नवंबर 2019 तक राज्य के अलग-अलग जगहों पर निम्न कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया है.

मुख्य सचिव ने कहा कि इन कार्यक्रमों में विभिन्न विषयों पर सामूहिक चर्चा और वैचारिक मंथन किए जाएंगे. इन कार्यक्रमों में प्रवासी उत्तराखंडियों, जो देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत हैं या रह रहे हैं, उन्हें गांवों से जोड़ने के लिए सरकार संकल्पित है.

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से संबंधित पोस्ट पर बहुत से लोगों ने अलग-अलग सवाल कमेन्ट बाक्स पर भी किये हैं. इन सवालों में सबसे अधिक पूछा गया सवाल यह है कि यदि सरकार उत्तराखंड में पलायन को लेकर कार्यक्रम कर रही है तो उसमें उत्तराखंड के गांवों में या सुदूरवर्ती क्षेत्रों में कोई कार्यक्रम क्यों नहीं कर रही है?

काफल ट्री डेस्क

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Girish Lohani

Recent Posts

कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा

कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है,…

1 day ago

बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार

पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…

4 days ago

आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”

पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…

4 days ago

भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्

ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…

5 days ago

उत्तराखण्ड के सरोवर

उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…

5 days ago

दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध

पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…

5 days ago