उत्तराखंड के वित्त मंत्री प्रकाश पंत का लम्बी बीमारी के बाद आज शाम अमेरिका में निधन हो गया. दिल्ली के बाद फिलहाल उनका अमेरिका में इलाज चल रहा था.
वे उत्तराखंड की राजनीति में कद्दावार नेता माने जाते थे. उन्हें साफ़-सुथरी राजनीति करने वाला नेकदिल इंसान माना जाता था. वे वित्त मंत्रालय के साथ ही आबकारी, पेयजल, संसदीय कार्य, विधायी कार्य, व्यावसायिक कर व अन्य कई विभाग भी संभाल रहे थे.
पिथौरागढ़ के विधायक प्रकाश पंत का जन्म नवम्बर 1960 में पिथौरागढ़ के ही गंगोलीहाट में हुआ था.ए उनकी राजनीतिक पारी की शुरुआत 1998 में उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य के रूप में हुई. वे 2002 से 2007 तक पिथौरागढ़ विधानसभा से निर्वाचित हुए. वे उत्तराखंड विधानसभा के पहले अध्यक्ष भी रहे.
प्रकाश पंत लम्बे समय से बीमार चल रहे थे. फरवरी में बजट पेश करने के दौरान बेहोश हो जाने के बाद से उनका इलाज किया जा रहा था. इस दौरान उन्हें पहले दिल्ली के राजीव गाँधी अस्पताल में भर्ती करवाया गया. दिल्ली में उनकी तबियत में सुधार होने के बाद वह देहरादून आ गए. इस दौरान पुनः तबियत बिगड़ने पर उन्हें पहले दिल्ली और फिर अमेरिका ले जाया गया. जहाँ आज शाम अमेरिका की टेक्सास यूनिवर्सिटी के अस्पताल में अंतिम सांस ली.
प्रकाश पंत अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र व 2 पुत्रियों को छोड़ गए हैं.
उनकी मृत्यु से भाजपा ने एक कुशल नेता खो दिया है. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और अन्य मंत्रियों ने उनके निधन पर अपना शोक प्रकट किया है. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा प्रदेश में 3 दिन का राजकीय शोक एवं कल 6 जून का राजकीय अवकाश घोषित किया गया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीटर पर शोक सन्देश लिखा
वाट्सएप में पोस्ट पाने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
पहाड़ के एक छोटे-से गाँव में एक पिता रहता था. उम्र अब ढलने लगी थी,…
सांस्कृतिक परम्परा की दृष्टि से उत्तराखण्ड एक समृद्ध राज्य है. समय-समय पर यहां के कई…
जाने-माने पत्रकार, साहित्यकार और फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी से कल शाम मुलाकात हुई. दरअसल,उनके निर्देशन में…
उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा के मुख्य आकर्षण में से एक रामलीला का मंचन इन…
लोग इसे पहाड़ और पलायन की कहानी की तरह देखेंगे. लोग इसे खंडहर होते जा…
पिछली कड़ी : सागर से शिखर तक : स्वामी मन्मथन संघर्षनामा का ये किस्सा आजादी…