Featured

दांत दर्द का ठेठ पहाड़ी ईलाज

पहाड़ों में जीवन अत्यंत कठिन है. इस कठिन जीवन को और अधिक कठिन बनाती है स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी. आज के वैज्ञानिक युग में हर रोग की दवा है हर रोग का इलाज है लेकिन जब विज्ञान न था तब रोगों का ईलाज आस्था था.
(Traditional Treatment of Toothache)

लोगों को किसी भी प्रकार का रोग हो ईश्वर की शरण उसका ईलाज था. वहां मंत्र तंत्र का जाप उसकी इसी आस्था का अगला रूप है. बुखार हो पेट में दर्द हो सांप काट ले सबका ईलाज ईश्वर की शरण में था. मंत्र होते तंत्र होते कुछ ठीक होते कुछ नहीं भी.

एक बीमार व्यक्ति के लिये स्वस्थ हो जाने का विश्वास सभी दवाओं ज्यादा उपयोगी होता है. उत्तराखंड के पहाड़ी समाज के लिये तो यह और भी अधिक सही बैठता है. यहां घर -घर में ऐसी कहानियां हैं जिन्हें कुछ लोग बड़ी आस्था से मानते हैं तो कुछ आडम्बर बताते हैं.
(Traditional Treatment of Toothache)

मंत्रों से ईलाज उत्तराखंड में सदियों से किया जाता है और आज अनेक पिछड़े क्षेत्रों में ये अचूक ईलाज माने जाते हैं. मंत्रों द्वारा किये जाने वाले इन इलाजों में किसी स्थानीय वस्तु, अनाज इत्यादि का प्रयोग कर मंत्रोच्चारण किया जाता है.

मंत्रोच्चारण में अपने गुरु या इष्टदेव या अपने लोकदेवता को याद किया जाता है. उसके प्रति समर्पण भाव दिखाकर यह कामना की जाती है कि वह उस बीमारी को दूर कर देंगे.

जैसे दांत में कीड़ा लगने पर चावल, कुशा और दाल के पांच छोटे-छोटे टुकड़े लेते हैं. मुंह के भीतर दाड़ में दाल और चावल के टुकड़े रखे जाते हैं और कुशा के प्रत्येक टुकड़े से इसे मंतरा जाता है. इस समय कहा जाने वाला मंत्र है:

ऊँ नमो गुरुजी को आदेस
कुं कुसारू कुं कुमारू
दाढ़ी मुड़े वस्यै कीड़ी
बारा बरस को मारू पीड़ा
चवक करे धवक करे तो
महादेव पारवती की आण पड़े
फुर्र मन्त्र फट स्वाहा
(Traditional Treatment of Toothache)

इस मंत्र के बाद दाल चावल थूक दिये जाते हैं. कहा जाता है कि इसके साथ ही दांत से कीड़ा निकल जाता है. इसी तरह दांत दर्द के लिये भी मंत्र हैं. दांत दर्द के समय अंगुली से या सुई, दराती या चाकू के फल को दर्द वाले दांत के पास रखते हैं और निम्न मंत्र का उच्चारण करते हैं:

हाड़-हाड़, मांसो-मांसो,
नौ नाड़ी बहत्तर कोठा,
खाये खिचखिचावे खून करे,
दर्द करे,
काल भैरव को चक्र फाटे,
हनुमान की दुहाई,
सीता पार्वती की दुहाई
फुर् मन्त्रो ईश्वरो वाच
ऊँ फट स्वाहा
(संदर्भ: पद्मादत्त पन्त द्वारा संग्रहित रोगोंपचारक लोक मंत्र संग्रह)
(Traditional Treatment of Toothache)

काफल ट्री डेस्क

हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online

इसे भी पढ़ें: पमपम बैंड मास्टर की बारात

Support Kafal Tree

.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

हिमालय के गुमनाम नायक की कहानी

इस तस्वीर में आपको दिख रहे हैं "पंडित नैन सिंह रावत" — 19वीं सदी के उन महान…

2 weeks ago

भारतीय परम्परा और धरती मां

हमारी भारतीय परंपरा में धरती को हमेशा से ही मां कह कर पुकारा गया है. ‘माता…

2 weeks ago

एटकिंसन : पहाड़ आधारित प्रशासन का निर्माता

तत्कालीन नार्थ वेस्टर्न प्रोविनेंस यानी उत्तर प्रदेश के जिस ब्रिटिश अधिकारी ने उन्नीसवीं शताब्दी के…

3 weeks ago

बीमारी का बहम और इकदँडेश्वर महाराज का ज्ञान

संसार मिथ्या और जीवन भ्रम है, मनुष्य का मानना है वह जीवों में श्रेष्ठ व बुद्धिमान…

3 weeks ago

शकटाल का प्रतिशोध

पिछली कथा में हमने देखा कि कैसे योगनंद सत्ता तक पहुँचा, शकटाल ने अपने सौ पुत्र…

3 weeks ago

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

2 months ago