Ghughuti

घुघुती की हमारे लोकजीवन में गहरी छाप हैघुघुती की हमारे लोकजीवन में गहरी छाप है

घुघुती की हमारे लोकजीवन में गहरी छाप है

घुघूती का महत्व देश के अन्य भागों में कितना है कह नहीं सकता किन्तु गढ़वाल-कुमाऊँ में घुघुती की छाप सबके…

5 years ago
काले कव्वा : एक दिन की बादशाहतकाले कव्वा : एक दिन की बादशाहत

काले कव्वा : एक दिन की बादशाहत

मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले ‘घुघते’ आदि पकवान बनाकर दूसरी सुबह बच्चों के द्वारा कव्वों को खिलाये जाते…

5 years ago
घुघुती, प्योली व काफल पर्वतीय लोकजीवन के कितने करीबघुघुती, प्योली व काफल पर्वतीय लोकजीवन के कितने करीब

घुघुती, प्योली व काफल पर्वतीय लोकजीवन के कितने करीब

ब्रह्मकमल और मोनाल को भले राज्य पक्षी एवं राज्य पुष्प का सम्मानजनक ओहदा मिल चुका हो, लेकिन लोकजीवन व लोकसाहित्य…

5 years ago