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बिशन गुरु की मार और ईश्वर से चवन्नी की गुजारिशबिशन गुरु की मार और ईश्वर से चवन्नी की गुजारिश

बिशन गुरु की मार और ईश्वर से चवन्नी की गुजारिश

जब मैं पहली बार शहर के स्कूल पहुँचा सन 1955 तक मैंने गाँव के स्कूल में पढ़ा जो चारों ओर…

6 years ago
दुर्दशा का शिकार महादेवी वर्मा सृजन पीठदुर्दशा का शिकार महादेवी वर्मा सृजन पीठ

दुर्दशा का शिकार महादेवी वर्मा सृजन पीठ

मेरे पास अनेक संदेश आ रहे हैं कि क्या महादेवी वर्मा सृजन पीठ बंद हो गयी है? उसे किसने बंद…

6 years ago
डेन्यूब किनारे हिमालय का पक्षी : बटरोही की कहानीडेन्यूब किनारे हिमालय का पक्षी : बटरोही की कहानी

डेन्यूब किनारे हिमालय का पक्षी : बटरोही की कहानी

फ्रैंकफर्ट में जहाज बदला और हंगरी के स्थानीय समय के अनुसार पूर्वाह्न साढ़े दस बजे, जिस वक़्त भारत में दोपहर…

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उत्तराखंड को लेकर क्या थी कौशिक समिति के सबसे बड़ी सिफारिशउत्तराखंड को लेकर क्या थी कौशिक समिति के सबसे बड़ी सिफारिश

उत्तराखंड को लेकर क्या थी कौशिक समिति के सबसे बड़ी सिफारिश

अपने बचपन के गाँव को ठीक-ठीक आज न स्मरण कर पाने का एक बड़ा कारण शहर आने के बाद उत्तराखंड…

6 years ago
महादेवी वर्मा और कुमाऊँ के रामगढ़ में उनकी मीरा कुटीरमहादेवी वर्मा और कुमाऊँ के रामगढ़ में उनकी मीरा कुटीर

महादेवी वर्मा और कुमाऊँ के रामगढ़ में उनकी मीरा कुटीर

महादेवी वर्मा हिन्दी साहित्य के महत्वपूर्ण छायावादी आन्दोलन के चार बड़े नामों में से एक थीं. इस समूह में उनके…

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मेरा और खड़कुवा का बचपनमेरा और खड़कुवा का बचपन

मेरा और खड़कुवा का बचपन

खड़कुवा और मेरी मांओं ने हमें ऐसे ही मिट्टी लिपे फर्शों पर जन्म दिया था और हमें गाँव किनारे के…

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नैनीताल की मिसेज बनर्जीनैनीताल की मिसेज बनर्जी

नैनीताल की मिसेज बनर्जी

‘हमारा जैसा बोलेंगा तो हिंदी कैसे बनेगा राष्ट्रभाषा, बोलो?’ ठीक तारीख याद नहीं है, 1978-79 के किसी महीने में एक…

6 years ago
अंग्रेजों ने अपने लिए माल रोड तो भारतीयों के लिए बनवाई ठंडी सड़कअंग्रेजों ने अपने लिए माल रोड तो भारतीयों के लिए बनवाई ठंडी सड़क

अंग्रेजों ने अपने लिए माल रोड तो भारतीयों के लिए बनवाई ठंडी सड़क

1841 में पीटर बैरन द्वारा बसाये गए इस नैनीताल शहर (history of Nainital) में ठीक 146 साल और अपने स्कूल…

6 years ago
भगवान तुलसीदास गलत नहीं लिख सकतेभगवान तुलसीदास गलत नहीं लिख सकते

भगवान तुलसीदास गलत नहीं लिख सकते

बुआजी के एक विधुर जेठ थे, जिन्हें घर के सब लोग ‘बड़े बाबजी’ पुकारते थे. मझोले कद के बड़े बाबजी…

6 years ago
बंपुलिस… द एंग्लो इंडियन पौटी – बटरोही की कहानीबंपुलिस… द एंग्लो इंडियन पौटी – बटरोही की कहानी

बंपुलिस… द एंग्लो इंडियन पौटी – बटरोही की कहानी

काफल ट्री में नियमित कॉलम लिखने वाले लक्ष्मण सिंह बिष्ट 'बटरोही' का जन्म 25 अप्रैल 1946 को अल्मोड़ा के छानागाँव…

6 years ago