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घासकटिया छक्के मारने वाला बॉम्बर वेल्स

बहुत समय नहीं हुआ जब क्रिकेट अपने महान खिलाड़ियों के अलावा कुछ ऐसे नामों के कारण भी बहुत लोकप्रिय था जो अपने जीते जी दूसरे कारणों से गाथाओं में बदल जाया करते थे. ऐसे ही एक खिलाड़ी थे ब्रायन डगलस वेल्स. इंग्लैंड की ग्लोस्टरशायर और नटिंघमशायर काउन्टी की तरफ़ से खेलने वाले वेल्स को उनके डीलडौल के कारण बॉम्बर वेल्स कहा जाता था.

उन्होंने क्रिकेट को कभी भी पेशे के तौर पर नहीं लिया. वे उसका लुत्फ़ उठाए जाने के हामी थे. वरिष्ठ क्रिकेट आलोचक माइकेल पार्किन्सन के शब्दों में : “उस के चेहरे पर हमेशा वसन्त खिला होता था और आत्मा के भीतर ठहाका”. वे ऑफ़ ब्रेक गेंदबाज़ी करते थे और ख़ासे सफल भी रहे. १९५१ से १९६५ के दौरान उन्होंने तीन सौ से ऊपर फ़र्स्ट-क्लास मैच खेले और ९९८ विकेट लिए.

ग्लोस्टर में ब्लैकलिस्ट किए गए एक ट्रेड-यूनियन लीडर के घर पैदा हुए इस खिलाड़ी को उसकी गेंदबाज़ी ने उतनी ख्याति नहीं दिलाई जितनी घटिया बल्लेबाज़ी और फ़ील्डिंग ने. और विकेटों के बीच दौड़ने के दौरान उनसे सम्बन्धित कहानियों की कोई गिनती नहीं है. ग्लोस्टर काउन्टी की ऑफ़ीशियल वैबसाइट पर उनके बारे में स्टीफ़न चॉक लिखते हैं: “बल्लेबाज़ के तौर पर उन्हें केवल एक शॉट खेलना आता था. वे हर गेंद को घास काटने वाली शैली से मिडविकेट के ऊपर मारने की कोशिश करते थे. कभी उनका बल्ला सही से लग जाता था जो छक्का ही पड़ता था.” ४२३ पारियों में करीब ढाई हज़ार रन बना चुके बॉम्बर के तीस फ़ीसदी से ज़्यादा रन छक्कों से आए थे.

फ़ील्ड में वे अक्सर बाउन्ड्री पर खड़ा होना पसन्द करते थे और दर्शकों से बातचीत का लुत्फ़ उठाया करते. एक बार उन्हें किसी दर्शक ने फ़ील्डिंग करते समय चाय का प्याला थमा दिया. तभी बल्लेबाज़ ने गेंद उन्ही की दिशा में उठा कर मारी. एक हाथ से चाय का प्याला सम्हालने की और दूसरे से कैच पकड़ने की कोशिशों में संजीदगी से मुब्तिला बॉम्बर वेल्स की कहानियां आज भी चाव से सुनाई जाती हैं.

उनसे सम्बन्धित सबसे बढ़िया क़िस्सा मशहूर अम्पायर डिकी बर्ड ने ‘फ़्राम द पविलियन एन्ड’ नामक किताब में लिखा है. वे बताते हैं कि बॉम्बर वेल्स ग्यारहवें नम्बर पर बैटिंग करने आते थे क्योंकि उसके नीचे कोई जगह नहीं होती. डेनिस काम्पटन ने वेल्स की रनिंग बिटवीन विकेट्स का कुछ इस तरह वर्णन किया था: “जब वह यस कहता तो समझिये वह आगामी बातचीत की भूमिका भर बांध रहा है.” दीगर है कि स्वयं काम्पटन भी एक बदनाम रनर थे और उनके बारे में कहा जाता था कि वे ‘यस’ कहने के बाद सामने वाले खिलाड़ी से ‘ऑल द बेस्ट’ कहना नहीं भूलते थे.

एक बार यही दोनों विकेट पर थे. दोनों घायल हो गए. दोनों ने रनर मंगा लिए. स्ट्राइक बॉम्बर के पास था और शॉट मारने के बाद वे रनर को भूल गए. यही बात काम्पटन के साथ हुई. जाहिर है दोनों रनर्स भी दौड़ रहे थे. पहला रन जैसे तैसे बन गया तो दूसरे की पुकार लगी. ‘यस’ ‘नो’ की चीखपुकार के बीच जब अन्ततः पिच पर पागलपन समाप्त हुआ, चारों खिलाड़ी एक ही एन्ड पर थे. सारा दर्शकसमूह हंसी से दोहरा हो गया था और यही हाल फ़ील्डर्स का भी था. ऐसे में एक युवा फ़ील्डर ने दूसरे एन्ड पर विकेट उखाड़ दिए. एलेक स्केल्डिंग मैच में अम्पायरिंग कर रहे थे. वे चारों के पास पहुंचे और बोले: “तुम कम्बख़्तों में से एक आउट है. कौन आउट है मुझे नहीं पता. ख़ुद ही फ़ैसला कर लो और जा कर अभागे स्कोरर्स को बता आओ!”

-अशोक पाण्डे

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